दिवसों जुदाई ना जाई छे,
ए जसे जरूर मिलन सुधी,
मुज हाथ झाली ने लइ जसे,
मुज शत्रु ओ ज स्वजन सुधी,
ना धरा सुधी ,ना गगन सुधी,
ना उन्नति , ना पतन सुधी,
फकत आपने तो जवु हतु ,
एक-मेक ना मन सुधी,
तमे राज-रानी ना चिर सम,
अमें रंक नार नी चुंददी,
तमे तन पर रहो घड़ी-बे-घड़ी,
अमें साथ दइये कफन सुधी,
जो हृदय नी आग वधी गई,
तो इश्वरे ज कृपा करी,
कोई श्वास बंध करी गयु,
के पवन ना जाए अगन सुधी,
तमे रंक ना छो रत्न समा,
ना मलो ए आँसू धूल माँ,
जो अरज कबूल हो आटली,
तो हृदय थी जाओ नयन सुधी,
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