Thursday, 27 December 2012


Bewafa raaste badalte hein
Ham safar saath saath chalte hein
Kiske aansoo chhupe hein phoolon mein
Choomta hun to hont jalte hein
Uski aankhon ko ghaur se dekho
Mandiron mein chiragh jalte hein
Eik deewar wo bhi shishey ki
Do badan paas paas j altey hein
Kaanch key, motiyon key, aansu key
Sab khilone ghazal mein dhalte hein

Saturday, 22 December 2012


तुजको दरीया दिली की कसम साकीया,
रौनकें मै-कदा यूँ ही बढ़ती रहे,
एक गिरता रहे एक सम्हलता रहे,,,
एक शबनम ही शाने गुलीस्तान नही,
शोला-ओ-गुल का भी दौर चलता रहे,
अश्क भी चश्म-ए-पूर-नम से बेहते रहे,
ओर दिल से धुना भी निकलता रहे,
तेरे कब्जे में हे ये निजाम-ए-जहां,
तू जो चाहे तो सहेरा बने गुलसीतां,
हर नजर पर तेरी फुल खिलते रहे,
हर इशारे पे मौसम बदलते रहे,
तेरे चेहरे पे ये ज़ुल्फ बिखरी हुई,
नींद की गोद में सुबहा निखरी हुई,
ओर इस पर सितम ये अदा ये तेरी,
दिल हे आख़िर कहा-तक सम्हलता रहे,,,,,

इस में खून-ए-तमन्ना की तासीर हे,
ये वफ़ा ये महोब्बत की तस्वीर हे,
एसी तसवीर बदले ये मुमकिन नही,
रंग चाहे जमाना बदलता रहे,,,,,


ग़म मुझे, हसरत मुझे, वहशत मुझे, सौदा मुझे,
एक दिल देकर ख़ुदा ने, दे दिया क्या क्या मुझे, ,
है हुसूल-ए-आरज़ू का राज़, तर्क-ए-आरज़ू,
मैंने दुनिया छोड़ दी तो मिल गयी दुनिया मुझे,
कह के सोया हूँ ये अपने इज़्तिराब-ए-शौक़ से,
जब वो आयें क़ब्र पर फ़ौरन जगा देना मुझे
सुबह तक क्या क्या तेरी उम्मीद ने ताने दिए ,
आ गया था शाम-ए-ग़म एक नींद का झोंका मुझे,
ये नमाज़-ए-इश्क़ है कैसा अदब किसका अदब,
अपने पा-ए-नाज़ पर करने भी दो सज़दा मुझे,
देखते ही देखते दुनिया से मैं उठ जाऊँगा,
देखती ही देखती रह जायेगी दुनिया मुझे ,,,,,
ग़म मुझे, हसरत मुझे, वहशत मुझे, सौदा मुझे, एक दिल देकर ख़ुदा ने, दे दिया क्या क्या मुझे, ,
है हुसूल-ए-आरज़ू का राज़, तर्क-ए-आरज़ू,
मैंने दुनिया छोड़ दी तो मिल गयी दुनिया मुझे, कह के सोया हूँ ये अपने इज़्तिराब-ए-शौक़ से, जब वो आयें क़ब्र पर फ़ौरन जगा देना मुझे
सुबह तक क्या क्या तेरी उम्मीद ने ताने दिए आ गया था शाम-ए-ग़म एक नींद का झोंका मुझे,
ये नमाज़-ए-इश्क़ है कैसा अदब किसका अदब, अपने पा-ए-नाज़ पर करने भी दो सज़दा मुझे, देखते ही देखते दुनिया से मैं उठ जाऊँगा, देखती ही देखती रह जायेगी दुनिया मुझे ,,,,,

तेरे क़रीब आके बड़ी उलजनो में हू,
में दोस्तों में हू, के तेरे दुश्मनों में हू,
मुजसे गुरेज-पा-हे तो हर एक रास्ता बदल,
में संग-ए-राह् हूँ, तो सभी रास्तों में हू,
तू आ चुका हे सतह पर कबसे ख़बर नही,
बे-दर्द में अभी उन्ही गहेराइयो में हू,
ए-यार-ए खुश दयार तुजे क्या ख़बर के में,
कबसे उदासीयो के घने जंगलो में हू,
तू लूट कर भी एहले-तमन्ना को खुश नही,
में लूट के भी वफ़ा के उन्ही काफिलो में हू,

बदला ना मेरे बाद भी मोजों-ए-गुफ्तेगु,
में जा चुका हूँ फिर भी तेरी महेफिलो में हूँ,
मुजसे बिछड़ के तू भी तो रोयेगाँ उम्र-भर,
ये सोच ले के में भी तेरी ख्वाहिशों में हू,
तू हस रहा हे मुज पर मेरा हाल देखकर,
ओर फिर भी सरीक में तेरे केह-कशो में हू,
ख़ुद भी मिसाल-ए-लाला-ए सहेरा लहू-लहू,
ओर ख़ुद "फराज़" अपने तमाशाइयो में हू,

Thursday, 20 December 2012


हे गर समंदर वो, तो हे उसका सलीका भी अजीब,
पेहले तो डूबायेगा, बच गया तो मोती पायेगा,
वरना हजारों फना हो गए तू भी जां से जयेगा,

शाम-ए-फिराक अब ना पूछ
आई ओर आ के टल गइ,,,,,,,
दिल था के दिल बहल गया,
जां थी की फिर सम्हल गइ,,,,,,,
बज़्मे खयाल में तेरे,
हुश्न की शम्म जल गइ,,,,,,,
दर्द का चाँद बूज गया,
हिज्र की रात जल गइ,,,,,,,,
जब तुजे याद कर लिया,
सुबहा महेक-महेक उठी,
जब तेरा गम जगा दीया,
रात मचल-मचल गइ,,,,,,,,,
दिल से तो हर मामला,
करके चले थे साफ़ हम,
कहने में उनके सामने ,
बात बदल-बदल गइ,,,,,,,,,

Wednesday, 19 December 2012


संग हर शख्स ने हाथों में उठा रख्खा हे,
जब से तूने मुजे दीवाना बना रख्खा हे,,
निगाह-ए-नाज़ से पूछेंगे,
किसी दिन
उसके दिल पर कड़ी इश्क में गुजरी होगी,
नाम जिसने भी महोब्बत का सजा रख्खा हे,
पत्थरो आज मेरे सर पे बरसते क्यूँ हो,
मेने तुमको भी कभी अपना खुदा रख्खा हे,
अब मेरे दीद की दुनिया भी तमाशाइ हे,,,,

निस्बत हुई जब से मुजे तेरे नाम से,
दुनिया पुकारती हे बड़े एहतराम से,
जब-तक बीका ना था तो कोई पूछता ना था,
तूने खरीदकर मुजे, अनमोल कर दीया,
जब से तुने दीवाना बना रख्खा हे,

Sunday, 16 December 2012


हाये मेरा दिल ले गया,
कोई छैल-छबीला बांका सा,
मर गए नैन लूट गया चैन,
जुल्मी ने ऐसे लूटा, रह गई तड़प के में,
मैंने कहा ना, ना, ना, ना,
बे-दर्दी एक ना माना,
छीन के ही ले  गया हां,,,,,,,,,,

जागी-जागी रातें मेरी,
जादू भरी बातें तेरी, नींद ना आये,
बैठी रहु मीठे-मीठे सपने सजाये,
मन मोहने परदेशीया, कैसा गज़ब कर दीया,


जागी-जागी रातें मेरी,
जादू भरी बातें तेरी, नींद ना आये,
बैठी रहु मीठे-मीठे सपने सजाये,
मन मोहने परदेशीया, कैसा गज़ब कर दीया,
हाये मेरा दिल ले गया,
कोई छैल-छबीला बांका सा,
मर गए नैन लूट गया चैन,
जुल्मी ने ऐसे लूटा, रह गई तड़प के में,
मैंने कहा ना, ना, ना, ना,
बे-दर्दी एक ना माना,
छीन के ही ले गया हां,,,,,,
हाय रब्बा दिल ले गया ,
कोई छैल-छबीला बांका सा,
लागे नैना तौहे नैना मौरे नैना,
साजन, हाये  ना लागे,
तेरा नाम लेके सोये, तेरा नाम लेके जगाए,
तुज बिन अब तो पीया लागे ना मोड़ा जिया,,,,
हाये मेरा,



राजदारो से बचके चलता हूँ,
गम-गुसारो से बचके चलता हूँ,
मुजको धौका दीया सहरौन ने,
अब सहरौन से बचके चलता हूँ,

शब-ए-गम की सहर नही होगी,
वो भी तो मेरे घर नही होगी,
जिन्दगी तू ही मुक्तसर हो जां,
शब-ए-गम मुक्तसर नही होगी,
रात यूं दिल में तेरी भुली हुई याद आई,
जैसे वीराने में बाहर आ जाए,
जैसे सेहरा में होले से चले बाद-नशी,
जैसे बीमार को बे-वजहाँ करार आ जाये,
मेने पूर-नूर सितारों में तुजे देखा हे,
मेने मासूम बहरों में तुम्हे देखा हे,
मेरे महेबूब तेरी पर्दा-नशीनी की कसम,
मेने अश्कों की कतारों में तुजे देखा हे,
आज की बात फिर नही होगी,
ये मुलाकात फिर नही होगी,
ऐसे बदल तो फिर आयेंगे,
ऐसी बरसात फिर नही होगी,,
रात उनको भी यूं हुआ महेसुस,
जैसे ये रात फिर नही होगी,
एक नजर मूड के देखने वाले,
क्या ये खैरात फिर नही होगी,
अंगडाई पे अंगडाई लेती हे रात जुदाइ की,
तुम क्या समजो तुम क्या जानो,
बात मेरी तन्हाइ {रूसवाई} की,
टूट गए सैयार नगीने, फुट बहे रुखसारो पर,
देखो मेरा साथ ना देना, बातें हे ये रुस्वाई की,
कौन सियाही घोल रहा हे, वक्त के बेहते दरीया में,
मेने आँख जुकी देखी हे ,आज किसी हरजाई की,
वस्ल की रात ना जाने क्यों,
इसरार था  उनको जाने पर,
वक्त से पहेले डूब गए, तारों ने बड़ी दानाइ की,
उड़ते-उड़ते आस् का पन्छी,
दूर् उफक में डूब गया,
रोते-रोते डूब गई आवाज़ किसी सौदाइ की,,,,,

Saturday, 15 December 2012

Jagjit Singh Ghazal Lyrics in Hindi: अब मेरे पास तुम आई हो - ab mere paas tum aayi ho...

Jagjit Singh Ghazal Lyrics in Hindi: अब मेरे पास तुम आई हो - ab mere paas tum aayi ho...

Tanhai Mein Faryaad To Kar Sakta Hoon
Veranay Ko Aabad To Kar Sakta Hoon

Jab Chahoon Tumhein Mil Nahi Sakta Laikin
Jab Chahoon Tumhein Yaad To Kar Sakta Hoon


Aaa... Koi Hanse To Tujhe Gham Lage Hansi Na Lage
K Dillagi Bhi Tere Dil Ko Dillagi Na Lage

Tu Roz Roya Kare Uth K Chaand Raaton Mein
Khuda Karay Tera Mere Baghair Ji Na Lage


Achi Surat Ko Sanwarne Ki Zaroorat Kia Hai
Sadgi Mein Bhi Qayamat Ki Ada Hoti Hai

Tum Jo Aa Jaate Ho Masjid Mein Adaa Karne Namaz
Tumko Maalom Hai Kitno Ki Qazaa Hoti Hai


Yeh Jo Deewane Se Do Chaar Nazar Aate Hain
In Mein Kuch Sahib-E-Asraar Nazar Aate Hain

Teri Mehfil Ka Bharam Rakhte Hain So Jaate Hain
Warna Yeh Log To Be(z?)daar Nazar Aate Hain


Mere Daaman Mein To Kaanton Ke Siva Kuch Bhi Nahi
Aap Phoolon K Kharidaar Nazar Aate Hain

Hashr Mein Kaun Gawaahi Meri Daiga Sagar
Sub Tumhare Hi Tarafdaar Nazar Aate Hain


Qasid Payaam-E-Khat Ko Dena Bohot Na Tool
Bas Mukhtasir Yeh Kehna K Aankhein Taras Gayi Hain

Kehnaa Ghalat Ghalat To Chupaana Sahi Sahi
Qasid Kaha Jo Usne Bataana Sahi Sahi


Yeh Subhu Subhu Chehre Ki Rangat Uree Howi
Kal Raat Tum Kahaan Thay Batana Sahi Sahi

Yeh Subhu Subhu Chehre Ki Rangat Uree Howi
Kal Raat Tum Kahaan Thay Batana Sahi Sahi


Maine Poocha Ke Kal Shab Kahan Thay
Pehle Sharmaaye Phir Hans Ke Bolay

Baat Kyun Tum Aisi Poochte Ho
Jo Bataane Ke Qabil Nahi Hai


Yeh Uree Uree Si Rangat, Yeh Khule Khule Se Gesu
Teri Subah Keh Rahi Hai, Teri Shaam Ka Fasaana

Kal Raat Tum Kahaan Thay Batana Sahi Sahi
Kal Raat Tum Kahaan Thay Batana Sahi Sahi


Na Hum Samjhay Na Tum Aaye Kahin Se
Paseena Poochiye Apni Jabeen Se

Kal Raat Tum Kahaan Thay Batana Sahi Sahi
Kal Raat Tum Kahaan Thay Batana Sahi Sahi


Dil Lay K Mera Haath Mein Kehte Hain Mujh Say Woh
Kya Loge Iske Daam Bataana Sahi Sahi

Aankhein Milaao Ghair Se, Do Hum Ko Jaam-E-Mai
Saaqi Tumhein Qasam Hai Pilaana Sahi Sahi


Nasha Pila Kar Giraana To Sabko Aata Hai
Maza To Tab Hai Jab Girtoon Ko Thaam Le Saaqi

Aaa... Nasha Imaan Hota Hai, Suraahi Deen Hoti Hai
Jawaani Ki Ibadat Kis Qadar Rangeen Hoti Hai


Sharab-E-Naab Ko Do Aatisha Bana Kar Pila
Sharaab Kam Hai To Saaqi Nazar Mila Kar Pila

Sharaab Ka Koi Apna Sarih-E-Rang Nahin
Sharaab Tajzia-E-Ehtesaab Karti Hai


Jo Ahl-E-Dil Hain Barhaati Hai Aabroo Unki
Jo Be-Shaoor Hain Unko Kharaab Karti Hai

Saaqi Tumhein Qasam Hai Pilaana Sahi Sahi
Saaqi Tumhein Qasam Hai Pilaana Sahi Sahi


Ay Mai-Farosh Bheerh Hai Teri Dukaan Per
Gaahag Hain Hum Be, Maal Dikhaana Sahi Sahi

Sajid To Jaan-O-Dil Se Faqat Aapka Hai Bus
Kya Aap Bhi Hain Us Ke, Bataana Sahi Sahi

Kehnaa Ghalat Ghalat To Chupaana Sahi Sahi...

Friday, 14 December 2012


Le kar tumhara naam jahan sir jhuka diya
Main ne usi diyar ko Kaaba bana diya

Sar jhukaya to patthar sanam ban gaye
Ishq bhatka tu had aashna ho gya

Rashk karta hai Kaaba mere kufar per
Main ne jis Bout ko pooja Khuda ho gaya

Gumrahi hai kay miraj he ishq ki
Hai janoon tu ye manzil he kon si

Us kay ghar ka pata puchte puchte
Puchne wala khud laa pata ho gaya

Main mohabbat se mouh mor leta agar
Toot pharti yea bijlli kisi aur per

Mere dil ki tabahi se ye tu huwa
Kam se kam dosro ka bhala ho gaya

Waqt e ehbab per chaayi sooraj girhan
Loog Dunya Khushi Chandni Zindagi

Mere mehboob ek tere ghum kay siwa
Jo mila rastey se juda ho gaya

Karoobar e Tamanna main ye tu huwa
Un kay qadmo pe marne ka mooqa mila

Zindagi bhar tu ghata uthatey rahe
Aaj pehli dafa faida ho gaya

Aisa bhatka kay loota nahi aaj tak
Aisa bichra kay aaya nahi aaj tak

Dil bhi kambakht he kis Qadar bawla
Aap kay ghar gaya aap ka ho gaya
Like ·  · Share

लेकर तुम्हारा नाम जहां सर जुका दीया,
मेने उसी दयार को काबा बना दीया,
सर जुकाया तो पत्थर सनम बन गये,
इश्क भटका तू  हद  आसना हो गया,
रश्क करता हे काबा मेरे कुफ्र पर,
मेने जिस बुत को पुजा खुदा हो गया,
घूम रही हे के मि राज हे इश्क की,
हे ये जुनूं तू ये मंज़िल हे कोनसी,
उसके घर का पता पूछते-पूछते,
पूछने वाला ख़ुद लापता हो गया,
में महोब्बत से मुँह मोड़ लेता अगर,
टूट पड़ती ये बिजली किसी ओर पर,
मेरे दिल की तबाही से ये तो हुआ,
कम-से-कम दुसरो का भला हो गया,
वक्त -ए-एहबाब परछाई सूरज ग्रिहन,
लोग दुनिया खुशी चांदनी जिंदगी,

मेरे मेहबूब एक तेरे घर के सिवा,
रास्ते जो मिला वो जुदा हो गया,



सर जुकाया पत्थर सनम बन गए,
इश्क बच गया हक्क आसना हो गए
रस्क करता हे करता हे काबा मेरे कुफ्र पर,
मेने जिस बुत को पूजा खुदा हो गया,
उसके घर का पता पूछते-पूछते,
पूछने वाला खुद लापता हो गया,
में महोब्बत से मुँह मोड़ देता अगर,
कौंध पड़ती ये बिजली किसी यार पर,
मेरे दिल की तबाही से ये तो हुआ,
कम से कम दूसरों का भलल्ला तो हुआ,


मेरे महेबूब इक तेरे गम के सिवा ,
जोमिला रास्ते से जुदा हो गाया,
कारोबारे तमन्ना में ये तो हुआ,
उनके कदमो पे मलने का मौका मिला,
जिन्दगी भर तो घाटा उथाते रहे ,
आज पेहली दफा फायदा हो गया,

बाझीचा-ए-अत्फाल हे दुनिया मेरे आगे,,,,,
होता हे शब्-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे,,,,,,
गो हाथ को जुम्बिश नही आंखो में तो दम हे,
रहने दो अभी सागर-ओ-मीना मरे आगे,,,,,,
मत पूछ क्या हाल हे मेरा तेरे पिछे,
तू देख् के क्या रंग तेरा हे मेरे आगे,,,,,,,,
ईमाँ मुजे रोके हे, जो खींचे हे मुजे कुर्फ,
काबा मेरे पिछे हे, कलिशा मेरे आगे,,,,,,,,,
होता ही नही गर्द में सेहरा मेरे होते,
घिसता हे ज़बां खाक में दरीया मेरे आगे,,,,,,

Thursday, 13 December 2012


तिर नजर का ओ दिलदारा,
तूने इस अंदाज़ से मारा,  हो  दुनिया मान गये,

तिर नजर का ओ दिलदारा,
तूने इस अंदाज़ से मारा, हो दुनिया मान गये,
के तू हे बड़ा रस नाम हे तेरे,
शाम अवध की बाल हे तेरे,,,
तड़पा तू क्या मस्त जवानी,
देख् के दुनिया हो दीवानी,,
ए ज़ुल्फ घनेरी यूँ लेहराये,
जैसे सावन जुमके आए,,,
कोमल-कोमल अंग हे तेरा,
चांदी जैसा रंग हे तेरा,
ए रेश्मी आँचल दस्त हिनाइ,
आती तेरी हर अँगड़ाई,
देखके जिसको मन ललचाये,
पतली कमर को क्यूँ बलखाये,
पग-पग धरती चूम रही हे,,,,
नागन जैसी जूम रही हे,
सर से पाव तक चलता जादू,
किसको रहे फिर दिल पे काबू,

चंचल नट-खट सौक हसीना,
लब पर हसी ओर दिल में सीना,
ओर दिल से खेले चाल जताकर,
मारा सबको अपना बनाकर,,,,,
हो तिर्छी नजर का करके इशारा,,
एक नही क्या लाखो को मारा,,,,,,
हो दुनिया मान गई,,,,,,,,

जाने तमन्ना जाने ग़ज़ल हे,
हुश्न-ए-मुजस्सम ताज-महल हे,,,
कहेलाने को माँहेजबीं हे,
हुश्न-ए-मुव्व्जब दिल में नही हे,
तेरी अदा ये जान की दुश्मन,
दस लेती हे बनके नागिन,
चाहने वाला चैन गवाये,
रोते-रोते नैन गवाये,
ए अमृत केहकर जहर पिलाये,
पिने वाला जान से जाए,
पीने वाला जान से जाए,
इसको त्यागा उसको लूटा,
कोई ना तेरे प्रेम से छूटा,
मारी एसी नैन कटारी,
जो भी लगा वो पंख पसारी,
हो गया दिल पारा-पारा,
बच ना सका कोई गम का मारा,
तीरे नजर का ,,,,,हो दुनिया,,,,,,,,,,







Wednesday, 12 December 2012


चाँदनी रात में सारा जहां सोता हे,
लेकिन तुम्हारी याद में कोई बद‍नसीब रोता हे,,
कहे तौ से सजना ये तोहरी सजनिया,
पग-पग लिए जां हो तौहरी बधाइआ,,,,,,
मगन अपनी धुन में रहे मोड़ें सैय्या,
पग-पग लिए जां हो तौहरी बधाइयां,,,,,,,
बदरीया से बरसो, घटा बनके छाऊ,
जीया तोहे चाहे तोहे अब ना पाऊँ,
लाज निगोडी मोरी, दोवे है पैय्या,,,,,,
में जग कोई रीत ना जानू,
माँग का तोहे सिंदूर मानु,
तूही चूडि़यां मोरी तू ही कलाइयां,,,,
मोहाई लगे प्यारे सभी रंग पिआरे,,
दुःख-सुख में, हर पल रहु संग पिआरे,
दरदवा को बांटे, मार लइ
चाँदनी रात में सारा जहां सोता हे,
लेकिन तुम्हारी याद में कोई बद‍नसीब रोता हे,,

में जग कोई रीत ना जानू,
माँग का तोहे सिंदूर मानु,
तूही चूडि़यां मोरी तू ही कलाइयां,,,,

कहे तौ से सजना ये तोहरी सजनिया,
पग-पग लिए जां हो तौहरी बधाइआ,,,,,,

Tuesday, 11 December 2012


अज हूँ ना आए बलमा सावन बीता जाए,
हाये रे,,,सावन बेटा जय,,,,,,,,,,,
नींद भी अंखियन द्वार ना आए,
तौसे मिलन की आस् भी जाए,,
आई बाहर खिले फुलवा,
मेरे सपने कौन सजाये, हाय  रे,,,सावन,,,,,,
चाँद को बदरा गरवा लगाये,,,
और भी मौरा मन ललचाये,,,,
यार  हसीन गले लग जां,,,,
मोरी उम्र गुजरती जाये,,,,,,,अज हूँ  ना आए,,,,

बहोत खूब-सूरत हे आँखें तुम्हारी,,,,,
अगर हो इनायत ए-जान-ए महोब्बत,
बना दीजये इनको किस्मत हमारी,,,,
जो सबसे जुदा हे वो अंदाज़ हो तुम,
छुपा था जो दिल् में वो ही राज हो तुम,
तुम्हारी नज़ाकत बनी जब से चाहत ,
सुकून बन गई हे हर एक बे-करारी,,,,,,,,,
ना थे जब-तलक तुम हमारी नजर में,
ना था चाँद सब में ना सूरज सहर में,
तुम्हारी इजाज़त, तुम्हारी हुकूमत,
ये सारा गगन हे, ये धरती हे सारी,,,,,,,,,,

Sunday, 9 December 2012


ना तुजसे उबा, ना जमाने से उबा,
में उबा तो अपने आप से उबा,
मेरे डूबने पे क्या कहे हर जुबा,
में डूबा तो अपने आप में डूबा,,,, मुकेश जोशी,,

क्या टूटा हे अन्दर-अन्दर, क्यूँ चेहरा कुम्हलाया हे,,
तन्हा-तन्हा रोने वाले, कौन तुम्हे याद आया हे,,,,,, क्या टूटा हे,,,,,,,,,
चुपके-चुपके सुलग रहे थे, याद में उनकी दीवाने,
एक तारे ने टूट के यारो क्या उनको समजाया हे,,,,, क्या टूटा हे,,,,,,,,
रंग-बेरंगी इस महफिल में, तुम क्यूँ इतने चुप-चुप हो,,,
भूल भी जां ओ बादल लोगो, क्या खॊया -क्या पाया हे,,,,,,क्या टूटा हे,,,,,,,,,,
शेर कहा हे खून हे दिल  का, जो लफ्ज़ों में बिखरा हे,,,
दिल के ज़ख्म जाल्के हमने महेफिल को गरमाया हे,,  क्या टूटा हे,,,,,,,
अब शहजादे ये जूठ ना बोलो,वो इतना बे-दर्द नही,,
अपनी चाहत को भी परखो,गर इल्ज़ाम लगाया हे,,,,,क्या टूटा हे,,,,,,,,,

Saturday, 8 December 2012


ना बरामद होता हे,
ना दरामद होता हे,
हुकूमत जिसके हाथ हो,
आसां कहा आमद होता हे,

मेरे दिल में तू ही तू हे,,
दिल की दवा क्या करूं ,
दिल भी तू हे, जां भी तू हे,
तुजपे फिदा क्या करू,
ख़ुद को खो कर, तुजको पाकर,
क्या-क्या मिला क्या कहूं,
तेरी होके जीने में क्या,
आया मजा क्या कहूं,
कैसे दिन हे केसी रातें ,
कैसी फिज़ा, क्या कहूं,
मेरी होके तूने मुजको ,
क्या-क्या दीया क्या कहूं,
मेरे पेहलू में जब तू हे,
फिर में दुआ क्या करू,,,,,,,,,,,

हे ये दुनिया, दिल की दुनिया,
मिलके रहेंगे  यहा,
लुतेंगे हम ख़ुशियाँ हर पल,
दुःख ना सहेंगे यहा,
अरमानो के चंचल धारे,
ऐसे बहेंगे यहा,
ये तो सपनो की जन्नत हे,
सब ही बहेंगे यहा,
ये दुनिया मेरे दिल में बसी हे,
दिल से जुदा क्या करू,


हम सफर बनके हम साथ हे आज भी,

फिर भी हे ये सफर अजनबी-अजनबी,,
राह् भी अजनबी, मोड़ भी अजनबी,
जायेंगे हम किधर, अजनबी-अजनबी,,,
जिन्दगी हो गई हे सुलगता सफर,
दूर तक आ रहा हे धुँआ सा नजर,
जाने किस मोड़ पर, खो गइ हर खुशी,
देख् दर्द-ए- जिगर, अजनबी-अजनबी,
हमने चुन-चुन के तिनके बनाया था जो,
आशियाँ हसरतों से सजाया था जो,
हे चमन में वही, आशियाँ आज भी,
लगता हे मगर अजनबी-अजनबी,,
किसको मालूम था दिन ये भी आयेंगे,
मौसमों की तरहा दिल बदल जायेंगे,
दिन हुआ अजनबी, रात भी अजनबी,
हर घड़ी, हर प्रहर अजनबी-अजनबी,


उसकी हसरत हे जिसे दिल से मिटा भी ना सकूं,
ढूँढने उसको चला हू , जिसे पा भी ना सकूं,
महेरबॉ हो के बुला लो मुजे चाहो जिस वक्त,
में गया वक्त नही हूँ के फिर अभी ना सकूं ,
डाल कर खाक मेरे खून पे कातिल ने कहा,
कुछ ये महेंदी नही मेरी के छुपा भी ना सकूं ,

ज़ुल्फ में ताना-ए अगियार का शिक़वा क्या हे,
बात कुछ सर तो नही हे, के उठा भी ना सकूं,

जब्त कम-बख्त ने, आ के गला घौंटा हे,
के उसे हाल सुनो तो सुना भी ना सकूं,
झहर मिलता ही नही मुजको सीतम गर वरना,
क्या कसम हे तेरे मिलने की के खा भी ना सकूं,

उसके पेहलू में जो ले जाके सुला दु दिलको,
नींद एसी उसे आए के जगा भी ना सकूं,


कोई गेसू कोई आँचल हमे आवाज़ ना दे,
अब किसी आँख का काजल हमे आवाज़ ना दे,
हम हे खामोश तो खामोश ही रहने दो हमे,
कोई आहट कोई हल-चल हमे आवाज़ ना दे,
हमने तन्हाइ को मेहबूब बना रख्खा हे,
रख के ढेर में शोलों को दबा रख्खा हे,
राख के ढेर को बिखरा गई जब तैज़ हवा,
सुनी-सुनी सी फिजां ओ में धुँआ उठने लगा,
आँच देने को उभर आई चिंगारी,
ओर भडकता हुआ शोला भी नजर आने लगा,
किस कदर आग को सीने में छुपा रख्खा था,
रख के ढेर में शोलों को दबा रख्खा था,
सोये जज़्बात को उकसा के ये क्या कर बैठे,
आज हम जोश में यूँ आके ये क्या कर बैठे,

तक रहे हे सभी हैरान निगाहों से हमे,
हम भी हैरान हे, गभराके ये क्या कर बैठे,
क्या हुआ था हमे क्यू होंश गवा रख्खा था,
राख के ढेर में शोला को दबा रख्खा था,
फिर पुकारा हे महोब्बत ने हमे क्या कीजे,
दी सदा हुश्न की जन्नत ने हमे क्या कीजे,
जिसके सा इश्क की अक‍सर हमे डर लगता था,
छु लिया फिर उसी हसरत ने हमे क्या कीजे,
हमने जज़्बात से दामन को बचा रख्खा हे,,,
राश आए ना  कभी प्यार के हालात हमे,
दिल के इस खेल में हर बार हुई मत हमे,
क्या करेंगे, कहा जायेंगे किधर जायेंगे,
दे गई जब भी दगा गर ये मुलाकात हमे,
राख के ढेर में शोला को दबा रख्खा था,



मर्द शीश  कटाये  नाक  नहीं , 
नेता शीश  गवाये  वोट  नहीं,                                                                                                          
कई  चीजों की  जहाँ में ये  प्रतीक  हो  गई,
 वो  आदमी  आदमी  नहीं  जिसकी  नाक  कट  गई, 
लगी  है  माथे  पर  , पर  महिमा उसकी माथे  से  अधिक  भइ ,
आँख  को  काजल  ओर सुरमा  नाक  को  तपकिर सही,
मर्द  शीश  कटाये नाक  नहीं,.......................................
इस  नाक  के  जहाँ  में  है,  प्रकार  अनेक, 
लंबी चौड़ी मिर्ची  जैसे  घाट  अनेक, 
कही  बोफोर्स कि  गन  कही  मिल  के  धुएँ  की  नली  ,
मर्द  शीश  कटाये   नाक नहीं,....................................................
एक  ज्योतिषी का  कथन  है, 
अजीब  घटना  होगी, 
इक्कीसवीं  सदी मै,
किसी  कि  नाक  नही  होंगी,
इस  दौर  में  नाक  से  महत्वपूर्ण कुर्सी  होगी, 
उसपर  बैठे  हुए  आदमी  कि,
हालत  योगी  से  बढके होगी,
आस-पास लाखों  मारे  जाए  , 
नहीं  कोई  असर  होगी,..
लेकिन  मेरा  विस्वास है, 
राम-  कृष्णा कि  भूमि में,
ऐसी  घटना, कभी  संभव  नहीं  होगी ,
इस  लिए मेरी  आपसे  प्रार्थना है, 
अभ्यर्थना है,  आपकी  क्षिण  होती , 
 लुप्त होती,  नाक  की  ओर  ध्यान  दे, 
इसकी  गरीमा को  बनाए  रख्खे,  
इंसानियत के  लिए,   इंसानियत के  लिए,  इंसानियत के  लिए,,,,,  ,........................................

Thursday, 6 December 2012


जवानी के, ही ले हया के बहाने,
ये माना के तुम से पर्दा करोगी,
ये दुनिया मगर तुज सी भोली नही हे,
छुपकर महोब्बत को रुस्वा करोगी,,,,
बड़ी कोशीशो से बड़ी कावीसो से,
तमन्ना की सेहमी हुई साजीसो से,
मिलेगा जो मौका तो बे-चैन होकर,
दरीचों से तुम मुज को देखा करोगी,,,,,,,,
सतायेगी जब चाँदनी की उदासी,
दुखा;येगी दिल जब फिज़ा की खमोशी,
उफक की तरफ़ खाली नजरे जमा कर,
कभी जो ना सोचा वो सोचा करोगी,,,,,,,,,
कभी दिल की धड़कन मेहसुस होगी,
कभी ठंडी सांसो के तूफां उठेंगे,
कभी गिर के बिस्तर पे आहे भरोगी,
कभी जुक के तकिये पे रोया करोगी,,,

बरसो के इंतज़ार का अंजाम लिख दिया,,,,,,,
कागज पे शाम काट के फिर शाम लिख दीया,,,,
बिखरी पड़ी थी टूट के, कलियां जमीन पर,
तरतीब दे के मेने तेरा नाम लिख दीया,,,,,
आसाँ नही तर्क-ए-महोब्बत की दास्ताँ,
जो आँसू ओ ने आखरी  पैग़ाम लिख दीया,,,
हम को किसी के हुश्न ने शायर बना दीया,
होठों का नाम लिख ना सके, जाम लिख दीया,
अल्लाह जिन्दगी से कहा तक निबाहु में,
किस बे-वफ़ा के साथ मेरा नाम लिख दीया,
तकसीम हो रही थी, खुदाई की नैमते,
एक इश्क बच गया, सो मेरा नाम लिख दीया,

"कैशर" किसी की दैन हे ये शायरी मेरी,
इश्की गजाल पे जिस में मेरा नाम लिख दिया,






ना सवाल बनके मिला करो,
ना जवाब बनके मिला करो,
मेरी जिंदगी मेरे ख्वाब हे,
मुजे ख्वाब बनके मिला करो,,,,,,
हर शाम को मेरे दोस्तों,
ना अजाब  बनके मिला करो,
मुजे मै-कदे में मिलो अगर,
तो शराब बनके मिला करो,
मुजे अच्छे लोग बहोत मिले,
में तो उनके कर्ज़ से मर गया,
अरे हो सके तो कभी-कभी,
खराब  बनके मिला करो ,
अभी सोचना हे तो सोच लो,
अभी छोड़ना हे तो छोड़ दो,

नए घोसलो में मिलो मुजे,
तो गुलाब बनके मिला करो,,,,,
ना तो इस तरहा से मिला करो,
ना तो उस तरहा से मिला करो,,,,,
हां हजूर बनके मिला करो,
हां जनाब बनके मिला करो,,,,,,,

Wednesday, 5 December 2012

फिर उसी बेवफ़ा पे मरते हैं
फिर वही ज़िन्दगी हमारी है

फिर खुला है दर-ए-अदालत-ए-नाज़
गर्म बाज़ार-ए-फ़ौजदारी है


हो रहा है जहाँ में अँधेर
ज़ुल्फ़ की फिर सरिशतादारी है

फिर दिया पारा-ए-जिगर ने सवाल
एक फ़रियाद-ओ-आह-ओ-ज़ारी है

फिर हुए हैं गवाह-ए-इश्क़ तलब
अश्क़बारी का हुकुमज़ारी है

दिल-ओ-मिज़्श्गाँ का जो मुक़दमा था
आज फिर उस की रूबक़ारी है

बेख़ुदी बेसबब नहीं "ग़ालिब"
कुछ तो है जिस की पर्दादारी है

Tuesday, 4 December 2012


मेरी तसवीर में रंग किसी ओर का तो नही,
घेर ले मुजको सब आँखें में तमाशा तो नही,,,,
जिन्दगी तुजसे हर-एक साँस पे समजौता करू,
सौक जिने का हे मुजको मगर इतना तो नही,,,
रूह को दर्द मिला दर्द को आँखें ना मिली,
तुजको मेहसुस तो किया हे, तुजे देखा तो नही,
सोचते सोचते दिल  डूबने लगता हे मेरा,
ज़हेन की तेह में मुज़फ्फर कोई दरीया तो नही,




मेरी तसवीर में रंग किसी ओर का तो नही,
घेर ले मुजको सब आँखें में तमाशा तो नही,,,

रूह को दर्द मिला दर्द को आँखें ना मिली,
तुजको मेहसुस तो किया हे, तुजे देखा तो नही,



Monday, 3 December 2012


आँख से दूर् ना हो दिल से उतर जयेगा,,,,,
वक्त का क्या हे गुजरता हे गुजर जयेगा,,,,,,,,
इतना मायुस ना हो खिलवटें गम से अपनी,
तू कभी ख़ुद को भी देखेगा तो डर जयेगा,,,,,,,,,
डूबते-डूबते कस्ती को उछला दे दु,
में नही कोई तो साहिल पे उतर जायेगा,,,,,,,,,
जिंदगी तेरी अता हे तो ये जानेवाला,
तेरी बख्शिस तेरी दहलीज़ पे धर जयेगा,,,,,,,
तुम सरे राह्-ए-वफ़ा देखते राह जाओगे,
ओर वो दोरे रफाकत से उतर जायेगा,,,,,,,,,,
जब्त लाजिम हे मगर दुःख; हे कयामत का "फराज़"
जालिम अब के भी  ना रोयेगा तो मार जायेगा,

Sunday, 2 December 2012

ये मोजजा मेरे साथ कभी हो नही शकता,
में ख़ुद में ही निहाँ हूँ, तो जुदा हो नही शकता,,,,,,
जो भटक रहे हे दर-बदर, मिट्‍टी ओर धूल उड़ाते,
वो नूर-ए-ज़ीस्त हे मिट्‍टी से मेला हो नही शकता,,,,,
आँख से देखने वाला नीला ही देखेगा उफक तक,
उस नीले की गहराइ में डूबा हो नही शकता,,,,


जिसने ख़ुद  ही मुफ्त बिखेरा हे ख़ुद का कतरा-कतरा,
वो मंडी में किसी कतरे का व्योपार धो नही शकता,,,,

Saturday, 1 December 2012


नासिर क्या केहता फिरता हे,
कुछ ना सुनो तो बेहतर हे,
दीवाना हे, दीवाने के,
मुँह ना लगो तो बेहतर हे,
कपड़े बदल कर बाल बनाकर,
कहा चले हो किसके लिए,
रात बहोत काली हे नासिर,
घर में रहो तो बेहतर हे,,
नए कपड़े बदलकर जाउ कहा,
ओर बाल बनाऊ किसके लिए,
वो शख्स तो सहेर ही छोड़ गया,,,,,,,,,,,
जिस धूप की दिल में ठंडक थी,
वो धूप उसी के साथ गई,
इन जलती-भलती गलियों में,
अब खाक उड़ो किसके लिए,
वो सहर में था तो उसके लिए ,
औरों से भी मिलना पड़ता था,
अब ऐसे वैसे लोगो के ,
में नाज़ उठाऊ किस के लिए,

मुद्दत से कोई आया ना गया,
सुन-सन्‌ पड़ी हे घर की फज़ा,
इन खाली कमरों में ,
अब शम्म जलाऊँ किसके लिए,,,



बहोत दिनों की बात हे,
खिजाँ को याद भी नही,
ये बात आज की नही,,,,
बहोत दिनों की बात हे,,,,,,
शबाब पर बहार थी,
फिज़ा भी खुश-गवार थी,
ना जाने क्यू में चल पड़ा,
में अपने घर से चल पड़ा,
किसी ने मुजे रोक कर,,
बड़ी अदा से टोक कर,
कहा था लौट आइए,
मेरी कसम ना जाइये,
पर मुजे ख़बर ना थी,
माहौल पर नजर ना थी,
ना जाने क्यूँ मचल पड़ा,
मे अपने घर से चल पड़ा,
में चल पड़ा,
में शहर से फिर आ गया,
खयाल था के पा गया,
उसे जो मुजसे दूर् थी,
मगर मेरी जरूर थी,
ओर एक हसीन शाम को,
में चल पड़ा सलाम् को,
कली का रंग देखकर,
नइ तरंग देखकर,
मुजे बड़ी खुशी हुई, खुशी हुई,
में कुछ इसी खुशी में था,
किसी ने जाँक कर कहा,
पराया घर से जाइये,
मेरी कसम ना आइए,
वो ही हसीन शाम हे,
बहार जिसका नाम् हे,
चला हूँ घर को छोड़कर,
ना जाने जाऊंगा किधर,
कोई नहीं जो टोक-कर,
कोई नहीं जो रोक-कर,
कहे के लौट आइए,
मेरी कसम ना जाइये,,,,,
मेरी कसम ना जाइये,,,,,,,,


बहोत दिनों की बात हे,
खिजाँ को याद भी नही,
ये बात आज की नही,,,,
बहोत दिनों की बात हे,,,,,,
शबाब पर बहार थी,
फिज़ा भी खुश-गँवार थी,
ना जाने क्यू में चल पड़ा,
में अपने घर से चल पड़ा,
किसी ने मुजे रोक कर,,
बड़ी अदा से टोक कर,
कहा था लौट आइए,
मेरी कसम ना जाइये,
पर मुजे ख़बर ना थी,
माहौल पर नजर ना थी,