Thursday, 28 February 2013
यूँ ही तन्हाइ में हम दिल को सजा देते हे,
नाम लिखते हे तेरा लिखके मीता देते हे,,,,
जब भी ना-कम मुहोब्बत का कोई जिक्र करें,
लोग हँसते हे मेरा नाम बता देते हे ,
अब खुशी की कोई तरकीब ना सोचे दुनिया,
अब ये आलम हे कुछ गम ही मजा लेते हे,,
अब तसल्ली नही दी जाती मरीज-ए-गम को,
देखने वाले भी मरने की दुआ देते हे,,,,,
अब तसल्ली नही दी जाती मरीज-ए-गम को,
देखने वाले भी मरने की दुआ देते हे,,,,,
Tuesday, 26 February 2013
चलो कुछ शब्दों की उत्तपत्ति पे सर्च करे,
अलग-अलग प्राणी ओ का अध्ययन करे,,
दो शब्द सुनने में आए,
हुंह जूनियर हुंह सीनियर हुंह,
जैसे सुनता हूँ कही पर हाउ,
इसपे जूनियर सीनियर,
ओर हो शकते हे ताइ-ताउ ,
शब्दों की उत्पत्ति में,
पशु ओ का बड़ा योग दान हे,
कुत्ते से हाउ, ओर नाग से हुँह-कार हे,
पर मेने इस पे खोजबीन की,
हुंह की उत्तपत्ती में बंदर का भी योगदान हे,
पेहले बंदर भी कर लेते होंगे हुंह,
अप-भ्रंश हो के हो गया हुप्प ,
अब हुंह की उत्तपत्ती,
नाग ओर नागिन के नाम जाती हे,
इस में अहंकार के जहर की बू आती हे,
हाउ-हाउ,, हुंह-हुंह से जो भी आहत होता हे,
वो अब आह-आह ओर उन्ह-उन्ह करता हे,
Monday, 25 February 2013
इश्क़ में जाँ से गुज़रते हैं.. गुज़रने वाले ...
मौत की राह.. नहीं देखते ... मरने वाले ;
आख़िरी वक़्त भी.. पूरा न किया वादा-ए-वस्ल ...
आप आते ही रहे .. मर गये.. मरने वाले ;
उठ्ठे और.. कूच-ए-महबूब में पहुँचे.. आशिक़ ...
ये मुसाफ़िर नहीं .. रस्ते में ठहरने वाले ;
जान देने का कहा मैंने .. तो हँसकर बोले ...
तुम सलामत रहो .. हर रोज़ के मरने वाले ;
आस्माँ पे .. जो सितारे नज़र आये 'आमीर' ...
याद आये मुझे .. दाग़ अपने .. उभरने वाले..."
****************** ' आमीर मीनाई '
Saturday, 23 February 2013
शायर है वो कोई दीवाना तो नहीं
लपटों में झुलसे वो परवाना तो नहीं
मगरिब का तारा, इस्मे-आज़म का प्यारा
अपना न सही लेकिन बेगाना तो नहीं
साहिबाँ हूँ मैं कोई फ़नकार तो नहीं
मेरे वास्ते यूसुफ़ का बाज़ार तो नहीं
झूठी रवायत मैं लानत पे भेजूं
दौलत-शोहरत मेरे यार तो नहीं
मकाँ टूटा है कोई घर तो नहीं
आवारा हूँ पर दर -बदर तो नहीं
रसम तोड़ना ख़ूब आता है मुझको
क़सम तोड़ने का हुनर तो नहीं
एक ही है ऊपर, दस-बीस तो नहीं
ख़ुदा है ख़ुदा, नक़्शानवीस तो नहीं
_______________________साहिब, बीबी और ख़ुदा
[साहिब दुनियादार हैं , बीबी बेक़ार हैं और ख़ुदा है कि थोड़ा ग़ैर ज़िम्मेदार
है. सब गड्डमगड्ड कर के ये एक महाबकवास देसी सोनेट तैयार है. ऐंवें ! मस्ती
में.]
Wednesday, 20 February 2013
बारहा दर-ब-दर पत्थर तलाशते हैं ये।
वह जो मिल जाय तो इक सर तलाशते हैं ये।।
हद हुई ताज की भी मरमरी दीवारों पर,
बदनुमा दाग़ ही अक्सर तलाशते हैं ये।
साफ़गोई से फ़ित्रतन न वास्ता इनका,
मंच ऊँचा व पा ज़बर तलाशते हैं ये।
बदख़याली से सरापा हैं ख़ुद सियाह बदन,
चाँद के मिस्ल हमसफ़र तलाशते हैं ये।
इनको फ़ुर्सत है कहाँ मिह्रबान होने की,
ख़ुद ज़ुरूरत पे मिह्रवर तलाशते हैं ये।
देख ग़ाफ़िल! हैं मह्वेख़ाब इस क़दर मयकश,
चश्मे-साक़ी में भी साग़र तलाशते हैं ये।।
(साफ़गोई=स्पष्टवादिता, पा ज़बर=मज़बूत पैर वाला, चाँद के मिस्ल=चाँद सा,
हमसफ़र=जीवनसाथी, मिह्रवर=मिह्रबाँ, कृपा करने वाला, मह्वेख़ाब=स्वप्न में
लीन, चश्मे-साक़ी=साक़ी की आँख, साग़र-शराब से भरा प्याला)
-ग़ाफ़िल
ख़ामोशी अच्छी नहीं इंकार होना चाहिए
ये तमाशा अब सरे बाज़ार होना चाहिए
ख़्वाब की ताबीर पर इसरार है जिनको अभी
पहले उनको ख़्वाब से बेदार होना चाहिए
अब वही करने लगे दीदार से आगे की बात
जो कभी कहते थे बस दीदार होना चाहिए
बात पूरी है अधूरी चाहिए ऐ जान-ए-जाँ
काम आसां है इसे दुश्वार होना चाहिए
दोस्ती के नाम पर कीजे न क्यूँ कर दुश्मनी
कुछ न कुछ आख़िर तरीकेकार होना चाहिए
झूठ बोला है तो उस पर क़ायम भी रहो ‘ज़फ़र’
आदमी को साहिब-ए-क़िरदार होना चाहिए -‘ज़फ़र’ इक़बाल
किस-किस अदा से तूने.. जलवा दिखा के मारा...
आज़ाद हो चुके थे .. बन्दा बना के मारा ;
अव्वल बना के पुतला .. पुतले में जान डाली...
फिर उसको ख़ुद क़ज़ा की.. सूरत में आके मारा ;
आँखों में तेरी ज़ालिम .. छुरियाँ छुपी हुई हैं...
देखा जिधर को तूने .. पलकें उठाके मारा ;
ग़ुंचों में आके महका .. बुलबुल में जाके चहका...
इसको हँसा के मारा .. उसको रुला के मारा ;
सोसन की तरह 'अकबर'.. ख़ामोश हैं यहाँ पर...
नरगिस में इसने छिप कर.. आँखें लड़ा के मारा..."
~~~~~~~~~~~~~ ' अकबर इलाहाबादी '
अव्वल : पहले
क़ज़ा : मौत
सोसन : एक कश्मीरी पौधा
Tuesday, 19 February 2013
जो सजर सूख गया हे हरा कैसे हो,,
में पयम्बर तो नही मेरा कहा कैसे हो,,,
जिसको जाना ही नही उसको खुदा क्यूँ माने,
ओर जिसे जान चुके हे वो खुदा कैसे हो,,,,,
दूर् से देख के मैंने उसे पहचान लिया,
उसने इतना भी नही मुजसे कहा कैसे हो,,,,
वो भी एक दौर जब मैंने तुजे चाहा था,,
दिल का दरवाजा हे, हर वक्त खुला कैसे हो,,,
Monday, 18 February 2013
महज 4 साल पेहले मेरे दिमाग की सफेद नस फट गई डॉक्टर कैह् रहा था ब्रेन-हैमरेज हे,,,,,,,
नादान हे बेचारा, ,,,,,,,,
उसे क्या पता मेरे बदन की कुछ रगो में बर्फ जमी हुई हे,,,,,
जो लगातार उष्ण-कटी बंध को ठंडा कर रही हे,,,
ये प्रकिया कभी-कभी लगता हे युगों से चल रही हे मेरे दिमाग में,
शायद एंटार्तिका उसी से बर्फाच्छादीत हे,,,,
ओर में भी इसी गुमा में हूँ के मेने उष्ण-कटी बंध को ठंडा कर दीया हे,
{ग्यारहवा दरवाजा},,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
Saturday, 16 February 2013
DUSRO KO HAMARI SAJAYE NA DE,
CHANDNI RAAT MEIN BADDUAYE NA DE.
PHOOL SE AASHIQUI KA HUNAR SIKH LE,
TITALIYA KHUD RUKEGI SADAYEN NA DE.
SAB GUNAHO KA IQRAR KARNE LAGE
IS KADAR KHUBSURAT SAJAYE NA DE.
MOTIYON KO CHUPA,SIPIYON KI TARAH,
BEWAFAON KO APNI WAFAYE NA DE.
MEIN BIKAHAR JAOGA MOTIYON KI TARAH,
IS TARAH PYAR SE MUJHE BADDUAYE NA DE.
CHANDNI RAAT MEIN BADDUAYE NA DE.
PHOOL SE AASHIQUI KA HUNAR SIKH LE,
TITALIYA KHUD RUKEGI SADAYEN NA DE.
SAB GUNAHO KA IQRAR KARNE LAGE
IS KADAR KHUBSURAT SAJAYE NA DE.
MOTIYON KO CHUPA,SIPIYON KI TARAH,
BEWAFAON KO APNI WAFAYE NA DE.
MEIN BIKAHAR JAOGA MOTIYON KI TARAH,
IS TARAH PYAR SE MUJHE BADDUAYE NA DE.
Friday, 15 February 2013
इश्क है तो इश्क का इजहार होना चाहिये
आपको चेहरे से भी बीमार होना चाहिये
आप दरिया हैं तो फिर इस वक्त हम खतरे में हैं
आप कश्ती हैं तो हमको पार होना चाहिये
ऐरे गैरे लोग भी पढ़ने लगे हैं इन दिनों
आपको औरत नहीं अखबार होना चाहिये
जिंदगी कब तलक दर दर फिरायेगी हमें
टूटा फूटा ही सही घर बार होना चाहिये
अपनी यादों से कहो इक दिन की छुट्टी दें मुझे
इश्क के हिस्से में भी इतवार होना चाहिये
मुनव्वर राना
होनी न चाहिए थी मुहब्बत, मगर हुई
पड़ना न चाहिए न ग़ज़ब में, मगर पड़े
जबीं काबे में रख दी, या सर-ए-कू-ए-बुताँ रख दी ग़रज़ अब उठ नहीं सकती, जहां रख दी वहाँ रख दी
ना नशेमन है न है शाख़-ए-नशेमन बाक़ी ...... लुत्फ़ जब है कि करे अब कोई बर्बाद मुझे
होनी न चाहिए थी मुहब्बत, मगर हुई
पड़ना न चाहिए न ग़ज़ब में, मगर पड़े
चलो जाओ.. हटो.. कर लो.. तुम्हें जो वार करना है...
हमें लड़ना नहीं है.. बस.. हमें तो प्यार करना है ;
मुहब्बत लाख गहरी हो.. मगर ये बात लाज़िम है...
कि पहली बार में तो.. हुस्न को.. इन्कार करना है ;
अभी कुछ शेर.. सीना चीर कर.. उतरा नहीं करते...
तिरे अबरू को.. थोड़ा और भी.. ख़मदार करना है ;
इसी चक्कर में.. हमने सैकड़ों.. दीवान पढ़ डाले...
सुना कर शेर.. उसको .. प्यार का इज़हार करना है ;
ये क्या है.. अब कहानी.. बीच में क्यों रोक रक्खी है...
ज़बाँ को ही.. नज़र के बाद बस.. इक़रार करना है ;
मुझे जाने दो.. मेरे और भी.. कुछ काम बाक़ी हैं...
जिसे महफ़िल सजानी है .. उसे तैयार करना है..."
~~~~~~~~~~~~~~~ ' अना कासमी '
अबरू : भवें
ख़मदार : टेड़ा
दीवान : ग़ज़ल की पान्डो लिपि ग़ज1
Thursday, 14 February 2013
Tuesday, 12 February 2013
" जैसे होती थी किसी दौर में.. हैवानों में...
बेसकूनी है वही.. आज के.. इंसानों में ;
जल्द उकताते हैं हर चीज़ से.. हर मंजिल से...
ये परिंदों की सी.. आदत भी है.. दीवानों में ;
उम्र भर सच के सिवा कुछ न कहेंगे.. कह कर...
नाम लिखवा लिया.. अब हमने भी नादानों में ;
जिस्म दुनिया में भी.. जन्नत के मज़े लेता रहा...
रूह.. इक उम्र.. भटकती रही.. वीरानों में ;
उसकी मेहमान नवाजी की.. अदाएं देखीं ...
हम भी सकुचाए से बैठे रहे.. बेगानों में ;
नाम.. सूरत तो हैं.. पानी पे लिखी तहरीरें ...
मेरी पहचान रहेगी .. मेरे अफसानों में ;
जो भी होना है.. वो निश्चित है.. अटल है ‘श्रद्धा’...
क्यूँ न कश्ती को.. उतारे कभी... तूफानों में ...."
~~~~~~~~~~~~~~~~ ' श्रद्धा जैन '
Sunday, 10 February 2013
Friday, 8 February 2013
श्री रामचंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणं !
नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं !!
कंदर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरम !
पट पीत मानहु तड़ित रूचि शुचि नौमि जनक सुतावरं !!
भजु दीनबंधू दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनं !
रघुनंद आनंद कंद कोसल चन्द्र दशरथ नन्दनं !!
सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदार अंग विभूशनम !
आजानु भुजषर चाप धर संग्राम जित खर दूषणं !!
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनं !
मम ह्रदय कंज निवास कुरु कामादि खल दल गंजनं !!
मनु जाहि राचेउ मिलही सो वर सहज सुन्दर सांवरो !
करुना निधान सुजान सीलु सनेहू जानत रावरो !!
एही भाँती गौरी असीस सुनि सिय सहित हिय हर्षित अलि !
तुलसी भवानी पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चलि !!
NIBHA SAKO TU KARO PIYAR WARNA MAT KARMA
BICHAR KAR TUM KABHI HUM KO UDAS MAT KARNA
ABHI BHI WAQT HAI CHAHO TU TUM SANBHAL JAO
KARO NA FIKR MERI AGE TUM NIKAL JAO
FESLA JO HO TUMHARA KARNE ME DER MAT KARMA
BICHAR KAR TUM KABHI HUM KO UDAS MAT KARNA
TUMHARE PIYAR ME AAJ JO MERI HALAT HAI
HAR IK LAMAHA LAGE K QIYAMAT HAI
MERA JO HAAL HAI APNA WO HAAL MAT KARMA
BICHAR KAR TUM KABHI HUM KO UDAS MAT KARNA
निभा सको तो करो प्यार वरना मत करना,,,
बिछड़ के तुम कभी हमको उदास मत करना,,,
अभी भी वक्त हे चाहो तुम सम्हल जाओ,
करो
जो फैसला हे कर लेना, देर मत करना,
BICHAR KAR TUM KABHI HUM KO UDAS MAT KARNA
ABHI BHI WAQT HAI CHAHO TU TUM SANBHAL JAO
KARO NA FIKR MERI AGE TUM NIKAL JAO
FESLA JO HO TUMHARA KARNE ME DER MAT KARMA
BICHAR KAR TUM KABHI HUM KO UDAS MAT KARNA
TUMHARE PIYAR ME AAJ JO MERI HALAT HAI
HAR IK LAMAHA LAGE K QIYAMAT HAI
MERA JO HAAL HAI APNA WO HAAL MAT KARMA
BICHAR KAR TUM KABHI HUM KO UDAS MAT KARNA
निभा सको तो करो प्यार वरना मत करना,,,
बिछड़ के तुम कभी हमको उदास मत करना,,,
अभी भी वक्त हे चाहो तुम सम्हल जाओ,
करो
जो फैसला हे कर लेना, देर मत करना,
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