Friday, 31 August 2012


मुँह की बात सुने हर कोई,
दिल के दर्द को जाने कौन,
आवाजों के इस बाज़ारों में ,
खामोशी पेहचाने कौन,,,,,,,,,,,,,
सदियों-सदियों वो ही तमाशा,
रस्ता-रस्ता लम्बी खोज,
लेकिन जब हम मिल जाते हे,
खो जाता हे, जाने कौन,,,,,,,,,,,

वो मेरा आइना हे तो,
में उसकी परछाइ हूँ,
मेरे ही घर में रेहता हे,
मुज जैसा ही जाने कौन,,,,,,,,,,,,,,,,,
किरण-किरण अलसाता सूरज,
पलक-पलक खुलती नींदे,
धीरे-धीरे बिखर रहा हे,
ज़र्रा-जर्रा जाने कौन,,,,,,,,,,,,,

Monday, 27 August 2012


''हज़ारों जवाबों से अच्छी है मेरी खामोशी, न जाने कितने सवालों की आबरू रखली,
वह असरदार तूने ग़ालिब बनके , बढ़िया तुक-बंधी करदी,
आज दाने-दाने को मोहताज हे देश का आम इंसान,
घोटालों-पे घोटाले, फिर भी कुछ नही बोले,
अब भी केहते हो "मैडम"  के कहे की मेने आबरू  रखली,
कलमाड़ी, राजा,चिद्दु ओर अब ख़ुद भी देश नैया, भवंर के हवाले कर् दी,

Saturday, 25 August 2012


अपने हाथों की लकीरो मे बसाले मुजको.
में हूँ तेरा तू नसीब अपना बना ले मुजको,
मुजसे तू पूछने आया हे वफ़ा के मानी,
ये तेरी सादा दिली मार ना डाले मुजको,
ख़ुद को में बाँट ना डालू कही दामन-दामन,
कर दीया तूने अगर मेरे हवाले मुजको,
वादा फिर वादा हे, में जहर भी पी जाउ "कतिल",,,,,
शर्त ये हे कोई बाँहों में सम्हाले मुजको,,,,,,,,,,,


अपनी आँखों के समुंदर में उतर जाने दे,
तेरा मुजरिम हूँ मुजे डुब के मर जाने दे,,,,,,,,
ए- नये दोस्त में समजूंगा, तुजे भी अपना,
पेहले माजी का कोई ज़ख्म तो भर जाने दे,,,,,
आग दुनिया की लगाई हुई , बूज जायेगी,
कोई आँसू मेरे दामन पे बिखर जाने दे,,,,,,,,,
ज़ख्म कितने तेरी चाहत से मिलें हे मुजको,
सोचता हूँ के कहूँ तुजसे मगर जाने दे,


उनको भूलें हुए अपने ही सितम याद आए,
जब उन्हें गैर ने तडपाया, तो हम याद आए,,,,
हम जमाने के मसाइल का गीला भूल गए,
जब हमे आपके बख्शे हुए गम याद आए,,,,,,,
बे-वफ़ा याद कभी तो उन्हें कर ले जिनको,
बंदगी में भी तेरे नक्शे-कदम याद आए,,,,,,,,,,
आज की रात बहोत जुल्म हुआ हे हम पर,
आज की रात हमे आप भी कम याद आए,,,,,,,,


यूँ ही तन्हाइ में, हम दिल को सजा देते हे,
नाम लिखते हे तेरा लिखके मिटा देते हे,
जब भी ना-काम मुहोब्बत का कोई जिक्र करे,
लोग हँसते हे मेरा नाम बता देते हे,,,,,,,,,,,,,,,
अब खुशी की कोई तरकीब ना सोचे दुनिया,
अब ये आलम हे कुछ गम ही मजा देते हे,,,,,,
अब तसल्ली नही दी जाती मरीजे गम को,
देखने वाले भी मरने की दुआ देते हे,...........
क्या जरूरत हे रफीक "बर्क" को ये जेहमत हो,
ला ओ हम ख़ुद ही नशे मन को जला देते हे,


या रब मेरी हयात से, गम का असर ना जाए,
जब तक किसीकी ज़ुल्फ परेशां सँवर ना जाए,
मेरे जुनूं को ज़ुल्फ के साये से दूर् रख,
रास्ते में छान्व पाके मुसाफिर ठहर ना जाये,
रेहता हूँ इस लिए में तस्सव्वुर से दूर्-दूर्,
दर हे कोई क़रीब से होकर गुजर ना जाए,
पीता हूँ इस लिए में मै-कदे से दूर्-दूर्,
इल्जामे तिश्नगी कही शाकी के सर ना जाए,

मेखुद ही अपनी तलाश में हूँ,
मेरा कोई रेहनुमा नही हे,.
वो क्या दीखयेंगे मुजको राहे,
जिन्हें ख़ुद अपना पता नही हे,,,,,,,,,,,,,,,
बहोत दीनो से में सुन रहा था,
सजा वो देते हे हर खता की,
मुजे तो इसकी सजा मिली हे ,
के मेरी कोई खता नही हे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
दिल आइना हे तुम अपनी सूरत,
सवार लो ओर ख़ुद ही देखो,
जो नुक्श होगा देखाइ देगा,
ये बे-जुबा बोलता नही हे,.........
ये आप नजरे बचा-बचा कर,
बगौर क्या देखते हे मुजको,
तुम्हारे काम आ शके तो ले लो,
हमारे ये काम का नही हे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मस्सरतो की तलाश में हूँ,
मगर ये दिल जानता नही हे,
अगर ग़मे जिंदगी ना होतो, हे,,,,,,,,,,,,
जिंदगी में मजा नही हे,

मेखुद ही अपनी तलाश में हूँ,
मेरा कोई रेहनुमा नही हे,.
वो क्या दीखयेंगे मुजको राहे,
जिन्हें ख़ुद अपना पता नही हे,,,,,,,,,,,,,,,
बहोत दीनो से में सुन रहा था,
सजा वो देते हे हर खता की,
मुजे तो इसकी सजा मिली हे ,
के मेरी कोई खता नही हे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
दिल आइना हे तुम अपनी सूरत,
सवार लो ओर ख़ुद ही देखो,
जो नुक्श होगा देखाइ देगा,
ये बे-जुबा बोलता नही हे,.........
ये आप नजरे बचा-बचा कर,
बगौर क्या देखते हे मुजको,
तुम्हारे काम आ शके तो ले लो,
हमारे ये काम का नही हे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मस्सरतो की तलाश में हूँ,

मगर ये दिल जानता नही हे,
अगर ग़मे जिंदगी ना होतो,
जिंदगी में मजा नही हे,,,,,,,,,,,,




Wednesday, 22 August 2012


में तेरी नजर का शुरूर हूँ,
तुजे याद हो के ना याद हो,
तेरे पास हो के भी दूर् हूँ,
तुजे याद हो के ना याद हो,
तेरी ज़ुल्फ है, मेरा हाथ है,
के तु आज भी मेंरे पास है,
तेरे दिल में मे भी जरूर हूँ,
तुजे याद हो के ना याद हो,
जब-जब तुम्हे भुलाया, तुम ओर याद आए,,,
जाते नही हे दिल से, अब-तक तुम्हारे साये,
तुमसे बिछड़ के हमने, दिल को बहुत सम्हाला,
गुलशन में ये ना बेहला, सेहरा में भी सताये,
तुम ओर याद आए,,,,,,,,,जब-जब,,,,,,,,
छाये रहे नजर में, तेरी ज़ुल्फ के अँधेरे,
कही आफताब चमके, कही चाँदनी जग-मगाये,
तुम ओर याद आए,,,,,,,जब-जब,,,,,,,,,
मरने की आरजू में हम जी रहे हे ऐसे,
जैसे की लाश अपनी, ख़ुद ही कोई उठाये,
तुम ओर याद आए,,,,जब-जब,,,,, 

Sunday, 19 August 2012


दील लगाकर हम ये समजे,
जींदगी क्या चीज हे,
इश्क केहते हे किसे ओर,
आशकी क्या चीज है,
बाद मुद्दत के मिलें तुम ,
इस तरह देखा इधर ,
जिस तरह एक अजनबी,
पे अजनबी डाले नजर,
आप ने ये भी ना सोचा दोस्ती क्या चीज है, ,,,,,,,,,,,,
पेहले-पेहले आप ही अपना बना बैठे हमे,
फिर ना जाने किस लिए दिल से भुला बैठे हमे,
अब हुआ मालूम हमको बे-रुखी क्या चीज है, ,,,,,,,,,,,,,
प्यार सच्चा है मेरा तो देखा लेनी ए-सनम ,
आप आकर तोड़ देंगे ख़ुद मेरी जंजीरे गम,
बंदा परवर जान लेंगे बन्दगी क्या चीज है,,,,,,,,,,,,,,,,,,


तस्वीर यार दिल से मिटाई ना गयी,
आँसू ओ से आग ये बुजाइ ना गई,
आश बनके साँस में अटकी हे उनकी याद ,
लाख चाहा भुलाना भुलाई ना गई
कोई किसीका दीवाना ना बने,
ओ तीरे नजर का निशाना ना बने,
आग लगी एसी आग तो है,
जिसके देखे से कोई जाल जाए,
एसी शम्मा का परवाना ना बने,
ओ तीरे नजर का  निशाना ना बने,
दिल लगाने को समजते थे दिल्लगी,
उनके हाथो दे दी अपनी जिंदगी,
दुनिया के हँसने का बहाना ना बने,
ओ तीरे नजर का.............

Friday, 17 August 2012


बस्ती-बस्ती पर्बत-पर्बत,
गाता जाए बंजारा,
लेकर दिल काएकतारा.................

पल दो पल का साथ हमारा,
पल दो पल की यारी,
आज रुके तो कल करनी हे,
चलने की तैयारी, चलने की तैयारी...........
कदम -कदम पर होनी बैठी ,
अपना जाल बिछाये, अपना जाल बिछाये,
इस जीवन की राह् में जाने ,
कौन कहा रह जाए, कौन कहा रह जाए,......
धन दौलत के पिछे क्यूँ है,
ये दुनिया दीवानी,
यहा की दौलत यहा रहेगी,
साथ नही है जा नी, साथ नही है जा नी......
दुनिया के बाज़ार में आखिर, 

चाहत भी व्योपार बनी,
तेरे दिल से उसके दिल तक,
चांदी की दीवार बनी,
बस्ती-बस्ती....................
हम जैसों के भाग में लिख्खा,
चाहत का वरदान नही,
जिसने हम को जन्म दीया,
वो पत्थर हे भगवान नही,
बस्ती-बस्ती..................

Tuesday, 14 August 2012


मन्नू मुनी बोले, शब्दों को तौल-तौल कर,
मौन व्रत छोड़ दीया, ख़ुद में खौल-खौल कर,
रिमोट कंट्रोल हे हाथ में, इटली वाली "माई" के
गाना चाहे तो भी गाना पाये गुण  अपने सॉइ के,
भ्रष्टाचार बढ़ा हे , एक हर्फ नही हे बोला ,
महँगाई ओर बढ़ेगी , अपने मन को टटोला,
तोता जैसे रट्टा हे, अपने मालिक के शब्द,
आज तक जिव्हा नही थी, क्यू थे निश्बद,
धन्य हे कली-काल, क्या नारी युग दिखाया,
अच्छे खासे सरदार को भी रिमोट से जिसने चलाया,
असम में जो भी हो रहा हे, ये हे कुदरती घटना,
अब बांगला-देश पडोशी हे, ये हे कुदरती संरचना,


मोंगोलीया से चढ़कर मोगल आ शकते हे,
युगों तक मौन रहने का हमे मौन व्रत सीखा शकते हे,
बांगादेशी तो पडौशी हे, बे-धड़क तशरीफ़ ला शकते हे,
केहने को तो बहोत हे ,पर नही केहना अब भाइ,
जब इटली की नारी ही देश में बहु बनके आई,
पाकिस्तान की पाक भावना से मन द्रवित हो उठता हे,
उसके असीम स्नेह् से, स्नेह् प्रज्ज्वलित हो उठता हे, 
उनके गुरु कसाब को, हमने कस कर हे स्नेह् में बंधा,
बीरीयाना खाए या तंदूरी हमे नही आपत्ति -नाही हे बाधा,
भ्रष्ट नही हे, "माई" के सब बच्चे हे, सच्चे.,
राम-देव या अण्णा सबके उतार देंगे कच्छे,

,




एक तेरा गम, उस-पर आँखें नम,
आरजू-ए तोड़ती रही राह् दम-ब-दम,
एक तू ही सनम, उठा ली जो कसम,
टूट ना पाये आखरी दम तक ये भरम,

Monday, 6 August 2012

पत्थर के खुदा, पत्थर के सनम , पत्थर के ही इनसान पाये हे,
तुम शेहरे मुहोब्बत केहते हो, हम जान बचाकर आए हे,
बुत-खाना समजते हो जिसको, पूछौना वहा क्या हालत हे,
हम लोग वही से लौटे हे, बस शुक्र करो लौट आए हे,

हम सोच रहे हे मुद्दत से, अब उम्र गुजारे भी तो   कहा,
सेहरा में खुशी के फुल खिले, शेहरो में ग़मों के साये हे,
होठों पे तबस्सुम हलका सा,आँखों में नमी सी हे "फाकिर",
हम एहले मुहोब्बत पर अकसर एसेभी जमाने आए हे,

Friday, 3 August 2012


जिंदगी का ये ही चलन है, ये ही चारा है,
कदम- कदम पे आरजू ओ को हमने मारा हे,
अब तक़दीर से क्यूँ करे सीकवा-गिला कोई ,
जिंदगी यूँ ही कितनी मायूस ओर बे-सहारा है,
जिंदगी का ये ही चलन है, ये ही चारा है,
कदम- कदम पे आरजू ओ को हमने मारा हे,
भूलें से मुहोब्बत कर बैठा , नादां था बेचारा दिल ही तो हे, दिल ही तो हे,
हर दिल से खता हो जाती हे, बिगङो ना खुदारा दिल ही तो हे,