Thursday, 31 May 2012

सरोज जी, मेने देखा हे हर कुए की,
उपरली सतह को प्यास से तड़पते हुए,
हर कुआ भीतर अपनी गेहराइ को गोल करता हे,
पानी के किसी स्त्रोत से सराबोर करता हे,
भूल से किसी बाल्टी से,
कुछ पानी टपक जाता हे ,
मानो कुए की उपारली सतह पे,
सावन आ जाता हे,
कुछ लत्ता ए, आस्-पास की,
हरी-भरी होके मुस्काती हे,
तब एहसास होता हे,
के कुआ प्यासे के पास हो के भी,
प्यासे के पास नही जाता हे,
वो तो ख़ुद अपनी ही उपरली सतह को भी तड़पता हे,

Wednesday, 30 May 2012

दूर् रह कर ना करो बात क़रीब आजा ओ,
याद रह जायेगी, ये रात क़रीब आजा ओ,
एक मुद्दत से, तमन्ना थी, तुम्हे छूने की,
आज बस में नही जजबात क़रीब आजा ओ,
शर्द-जौंको से भड़कते हे ,बदन में शोले,
जान ले लेगी ये बरसात क़रीब आजा ओ,
इस कदर हमसे जीजकने की, जरूरत क्या हे,
जींदगी भर का हे अब साथ, क़रीब आजा ओ,

Sunday, 27 May 2012

मैंने कई बार चाहा की
तुमसे कहूँ
मुझे एक शाम सिंदूरी दे दो ......!

मैं थक चुकी हूँ ,
टुकडो में जीते हुए
मुझे एक जिंदगी पूरी दे दो ....!

आँखों में छुपा लू
मन में बसा लू
मेरे मन को स्मृतियों की मयूरी दे दो ...!

है अगर कोई बंधन
तो मुझसे कहो
काट डालू मैं वो बंधन,मुझे सिर्फ मंजूरी दे दो..... !

तुम्हारे पास है
और मैं भटक रही हूँ
तुम मुझे मेरी कस्तूरी दे दो ..!!
तू भी दिल की तरहा ,सादगी अपनाया कर,
बड़े-बड़े अल्फाज दिल की जुबाँ नही जानती,
देना हे तो दे, बस इतने,सलीक़े से प्यार दे,
ये दिल की मंडी हे, हे व्यापर यहां लानती,

Thursday, 24 May 2012

एतबार करते ही रहे, तुझ पर, हर बार हम
दिल जलाने में भी एक अलग मज़ा ही तो हे,
तार-तार होते ही रहे, खाके तीर ए-वादा-सुखन,
दिल लगाना ,भी एक अलग सजा ही तो हे,

Tuesday, 22 May 2012

या खुदा मुज पर इतना, एहसान ओर करदे,
मेरे दफन का मेरे कफन का इंतेजांमात करदे,
की अब महेंगाइ में, बेवक्त मरना भी नही अच्छा,
दो-चार गुनाह्, दो-चार नमाज, हिसाब सब तमाम करदे,
जाते हुए ये पल चीन कयु जीवन लिए जाते हे,
जोड़े ये ही जोड़े ये ही तोड़े सब नाते,
मन जितना जीना चाहे,तन उतना ही मरताजाए,
इंसाँ की हिमाकत देखो, उम्मीद ही करता जाए,
कोई राह् मंज़िल की सूजे तो बतलाये,
रंग ओर सुगंध का जादू , सदियों से चलता आया,
इनसान इसी में  डूबा नादान ये ही भरमाया,
अब कौन ये सोचे, क्या, खॊया ओर क्या पाया,
विश्वास में वास हे विष का, आशा में छुपी हे निराशा,
शब्दों के संग ना बेहना,अर्थो से भरी हर भाषा,
इनसान का दिल भी पत्थर सा जाए तराशा,
जिंदगी के उसी मोड़ पे,हम आश लगाये खड़े हे,
पैरों में उस के वादों के, भँवर लिपटे पड़े हे
किस ख़ूबसूरती से बिना कहे चला गया वो,
इक उम्र बीत गई उसी जगह आज भी खड़े हे,
के डूब भी जाए साँसें, इंतज़ार के दरीया में,
हम सफीनो के सहारे, अपनी उम्मीद पे अड़े हे
एक अहल्या थी जो पत्थर सी पथराई थी,
एक हम हे के बनके "बुत" ठोकरों में गड़े हे

Monday, 21 May 2012

अपनी मरजी से कहा अपने सफर के हम हे,
रुख हवा ओका जिधर का हे,  उधर के हम हे,
पेहले हर चीज थी अपनी, मगर अब लगता हे,
अपने ही घर में , किसी दुसरे घर के हम हे,
वक्त के साथ हे, मिट्‍टी का सफर, सदियों से,
किसको मालूम कहा के हे, किधर के हम हे,
चलते रेहते हे की चलनाहे,मुसाफिर का नसीब,
सोचते रेहते हे , किस राह्-गुजर के हम हे,

Sunday, 20 May 2012

तुम धूप हम साया रहे देर-तक,
क्यू बीच में हमारे काया देर-तक,


Friday, 18 May 2012

मेरे एहसास में तू, कूछ इस कदर समाये,
जहां देखूं,जिधर देखूं,हर-सु तू, नजर आए,
मेरी पलकों में आँसूं की तरह रख लू तुझको,
तेरे ख्याल आते, हथेली में तू,संवर जाए,

Wednesday, 16 May 2012

जिंदगी, तूने लहू ले के दीया कुछ भी नही,
तेरे दामन में, मेरे वास्ते क्या कुछ भी नही,
मेरे इन हाथो की चाहोतो तलाशी ले लो,
मेरे हाथों में लकीरों के सिवा कुछ भी नही,
मेने देखा हे, कई ऐसे, खुदा ओ को यहा,
सामने जिनके वो सच-मुच का खुदा कुछ भी नही,
या खुदा अब के ये किस रंग में आई हे बाहर,
जर्द ही जर्द हे पेड़ों पे हरा कुछ भी नही,
दिल भी एक जिद पे अदा हे किसी बच्चे की तरहा,
या तो सब-कूछ ही इसे चहियें,या कुछ भी नही,

Tuesday, 15 May 2012

गरज-बरस प्यासी धरती पर फिर पानी दे मौला,
चिड़ियों को दाने बच्चों को गुड़-धानी दे मौला,
दो ओर दो का जोड़ हमेशा चार कहा होता हे,
सोच-समज वालों की थोड़ी नादानी दे मौला,
फिर रोशन कर झहर का प्याला चमका नईं सलीबें,
जूठो की दुनिया में सच को काबानी दे मौला,
फिर मूरत से बाहर आकर चारों ओर बिखरजा,
फिर मंदीर को कोई मीरा दीवानी दे मौला,
तेरे होते कोई किसीकी जान का दुश्मन क्यू हो,
जिने वालों को मरने की, आसानी दे मौला,
ये  जिंदगी,
ये  जिंदगी,.......
आज जो तुम्हारे, बदन की छोटी बड़ी नसों में,
मचल रही हे, तुम्हारे पैरो से चल रही हे,
तुम्हारी आवाज़ में, गले से निकल रही हे,
तुम्हारे लफ्ज़ों में ढल रही हे,.......ये..जिंदगी,
ये जेंदगी जाने कितनी सदियों से,
यु ही शक्लें बदल रही हे, ये ..जिंदगी....
बदलती शक्लें, बदलते जिस्मो ,
में चलता फिरता ये एक शरारा,
जो इस घड़ी नाम हे तुम्हारा,
इसी से सारी चहल-पहल हे,
इसी से रोशन हे हर नजारा,
सितारे तोडों ,या घर बसाओ,
अलम उथाओ, या सर जुकाओ,
तुम्हारी आँखों की रोशनी तक,
हे खेल सारा,
ये खेल होगा नही दुबारा,
ये खेल होगा नही दुबारा,
ये  जिंदगी,
ये  जिंदगी,.......
आज जो तुम्हारे, बदन की छोटी बड़ी नसों में,
मचल रही हे, तुम्हारे पैरो से चल रही हे,
तुम्हारी आवाज़ में, गले से निकल रही हे,
तुम्हारे लफ्ज़ों में ढल रही हे,.......ये..जिंदगी,
ये जेंदगी जाने कितनी सदियों से,
यु ही शक्लें बदल रही हे, ये ..जिंदगी....
बदलती शक्लें, बदलते जिस्मो ,
में चलता फिरता ये एक शरारा,
जो इस घड़ी नाम हे तुम्हारा,
इसी से सारी चहल-पहल हे,
इसी से रोशन हे हर नजारा,

सितारे तोडों ,या घर बसाओ,
अलम उथाओ, या सर जुकाओ,
तुम्हारी आँखों की रोशनी तक,
हे खेल सारा,
ये खेल होगा नही दुबारा,
ये खेल होगा नही डूबरा,

Monday, 14 May 2012

फ़ना होने का दम रखना
तभी भीतर कदम रखना .
ये इश्क की राह आसान नहीं,
हौसला दम-बदम रखना,
सांस साँस है, धड़कन-धड़कन,
दिल में, दैरौ-हरम रखना,
जिंदगी यु ही कट जायेगी
सुनहरा सा, कोई भरम रखना,
मेरी राह ,चलना आसान नहीं,
पाँवों में छाले, तन पे "कफन"रखना,
मुफलिसी में मयस्सर क्या होगा,
अरमानो- आरज़ू कही दफन रखना

पलकों पे आके जो थेहरा हे "मोती",
उसमे कैद तू "सनम"रकना,

मुजे तुम नजर से गिरा तो रहे  हो,
मुजे  तुम कभी भी, भुला ना सकोगे,
ना जाने मुजे क्यू यकीन हो चला हे,
मेरे प्यार को तुम मिता ना सकोगे,
मेरी याद होगी जिधर जाओगे  तुम,
कभी नगमा बनके, कभी बनके  आँसू,
तड़पता मुजे हे, ना रख पाओगे तुम,
शमा जो जलाइ हे  मेरी वफ़ा ने  ,
बुजा ना चाहोगे  बुज़ा ना सकोगे तुम,
कभी नाम बातों में  आया जो  मेरा,
तो बे-चैन हो हो के दिल थाम लोगे,
निगाहों में छायेगा गम का अन्धेरा,
किसी ने  जो पूछा सबब आँसू ओका,
बताना भी चाहो  बता ना सकोगे,

सदमा तो हे मुजे  भी,
के तुजसे जुदा हूँ  में,
लेकिन ये सोचता हूँ,
की अब तेरा क्या हूँ में,
बिखरा पड़ा हे तेरे ही,
घर में तेरा वजूद,
बेकार मेहफिलौ में,
तुजे ढूँढता हूँ में,....सदमा......
क्या जाने  किस अदा से लिया,
तूने  मेरा नाम,
दुनिया समज रही हे  ,
के सब-कुछ तेरा हूँ में,......सदमा......
ले  मेरे तजुर्बौ से सबक ,
ए मेरे रकीब,
दो-चार साल उम्र में ,
तुजसे बड़ा हूँ में,.....सदमा......

Sunday, 13 May 2012


तमाम उम्र तेरा, इंतज़ार हमने किया,
इस इंतज़ार में किस-किस से, प्यार हमने किया,
तलाशे दोस्त को एक उम्र चाहिये ए दोस्त,
की एक उम्र तेरा इंतज़ार हमने किया,
तेरे खयाल में दिल सादमा रहा बरसो,
तीरे हजूर  इसे सोगवार हमने किया,
ये तिश्नगी हे की उनसे क़रीब रेहकर भी,
हाफिज़ याद उन्हें बार-बार हमने किया,
कभी ए-हकिकते मुंतिजर नजर आ लिबासे मजाज में,....
के हजारों सजदे तड़प रहे,हे मेरी  जबिने नियाज़ में,......
ना बचा-बचा के तू रख इसे, तेरा आइना हे वो आइना,
के सीकस्ता हो तो अज़ीज़-तर, हे निगाहे आइना साज् में,......
ना वो इश्क में रही गर्मियां, ना वो हुश्न में रही शौखिया,
ना वो गज़ नबी में तड़प रही, ना वो खम हे जुल्फे अयाज में,.......
मे जों सर प सजदा कभी हुआ, तो जमी पे आने लगी कजा,
तेरा दिल तो हे सनम आशना , तुजे क्या मिलेगा नमाज में,  ......      

Saturday, 12 May 2012

इनसान सबसे पेहले बोलता हे वो शब्द हे माँ,
जिसका कोई शानी नही ,
उसकी ममता किसी भी युग में फानी नही, 
ओर माँ के बग़ैर किसी की ज़िंदगानी नही,
मेरी दुनिया हे माँ, तेरे आंचल में,
शीतल छाया तू ,दुख के जंगल में,
ओ मेरी रहो के  दीये, तेरी दो अँखिया,
मुजे गीता से  बड़ी तेरी दो बतिया,
जूग में  मिलता वो, सो मिला है पल में,
मेने आँसू ही दीये पर तू रोई ना, 
ओ, मेरी निंदिया के लिए, बरसो सोइ ना,
ममता बाँटे रही गम की हल-चल में,
काहे ना धौ के पिएँ ये चरण तेरे माँ,
देवता प्याला लिए, दरपे खड़े माँ,
अमृत सरका हे इस गंगा जल में.......





Friday, 11 May 2012

दोस्तों की शिकायत करूँ में ,
ये भी मुजको गवारा नही हे,
दोस्तों ने करम वो किए हे,
जिंदगी की तमन्ना नही हे,
सोच कर बे-वफ़ा मुजको कहिये,
खुल ना जाए  भ्रम आपका ही,
आजमाया हे दुनिया को मैंने,
आपने मुजको परखा नही हे,
हो के बे-ताब मैयत पे मेरी,
तुम ये क्यू  बे-नकाब आगये हो,
उम्र भर मुजसे पर्दा किया था,
आज क्यूँ मुजसे परदा नही हे,
आप होंगे वफ़ा ओके  माहिर,
एक दिन ये हकीकत हे लेकिन,
आपका तो भरोसा हे मुजको,
जिंदगी का भरोसा नही हे,

Thursday, 10 May 2012

सुबहा तक इंतज़ार  करो,
तुम खुल जाओगे,  कमल की पत्ती की तरहा,
कई भंवरों ने दम तोड़ा होगा ,
लम्हा-लम्हा तेरी आगोश में, एक कैदी की तरहा,========================,
अँगड़ाई पर अँगड़ाई,
लेती हे रात जुदाई की,
तुम क्या समजो तुम क्या जानो,
बात मेरी तन्हाइ की,
टूट गए सैयार नगीने,
फुट बहे रुखसारो पर,
देखो मेरा साथ ना देना,
बातें हे ये रूसवाई की,
कौन सियाही ढोल रहा था,
वक्त के बेहते दरीया में,
मेने आँख जुकी देखी हे,
आज किसी हरजाई की,
कत्ल की रात ना जाने क्यूँ,
इसरार था उनको जाने पर,
वक्त से पेहले डूब गए ,तारों

वक्त से पेहले डूब गए ,तारों ने बड़ी दानाइ की,
उड़ते उदते आँख का पन्छी,
दूर् उफक में डूब गया,
रोते -रोते बैठ गई, आवाज़ किसी सौदाइ की,

Monday, 7 May 2012


भाईरे .................
गंगा ओर जमुना की ,बेहती हे धार,
आगे या पीछे सबको हे जाना..हे पार......
धरती कहे पुकार के,
गीत गा ले प्यार के ,
मौसम बिता जाए,
मौसम बिता जाए,
अपनी कहानी छोड़ जा,
कुछ तो निशानी छोड़ जा,
कौन कहे इस और,
तू फिर आए ना आए, मौसम बिता जाए,..
तेरी राहो में कइयों ने नैना बिछाये,
डाली-डाली कोयल काली तेरे गीत गाये,,..
अपनी कहानी छोड़ जा,
भाइ  रे.......
नीला अंबर मुस्काये,
हर साँस तराने गाये,
हाये तेरा दिल क्यूँ मुरझाये,
मन की बंसी पे तू भी,
कोई धुन बजाले, 
तू भी मुस्कुराले,, भाइ  रे.....
भाईरे गंगा ओर जमुना की ,बेहती हे धारा,
आगे या पीछे सबको हे जाना........
धरती कहे पुकार के,
गीत गा ले प्यार के ,
मौसम बिता जाए,
मौसम बिता जाए,
अपनी कहानी छोड़ जा,
कुछ तो निशानी छोड़ जा,
कौन कहे इस और,
तू फिर आए ना आए, मौसम बिता जाए,..
तेरी राहो में कइयों ने नैना बिछाये,
डाली-डाली कोयल गाये तेरे ही तराने,

Sunday, 6 May 2012

मेरे जैसे बन जाओगे जब इश्क तुम्हे होजायेगा,
दीवारों से टकरओगे जब इश्क तुम्हे हो जायेगा,
हर बात गवारा कर लोगे, मन्नत भी उतारा कर लोगे ताविजे भी बंधवाओगे,
जब इश्क तुम्हे  हो जयेगा,
तन्हाइ के जुले जुलोगे,हर बात पुरानी भूलोगे,
आइने से भी गभराओगे,
जब इश्क तुम्हे हो जायगा,
जब सूरज भी खो जयेगा, ओर चाँद कही सो जायेगा ,
तुम भी घर देर से आ ओगे ,
जब इश्क तुम्हे  हो जयेगा,
बे-चेनी जब बढ़ जायेगी, ओर याद किसीकी आयेगी
तुम मेरी ग़ज़लें गाओगे,
जब इश्क तुम्हे  हो जयेगा,
हर-सु  दिखाई देते हे, वो जल्वागर मुजे.,
क्या-क्या फरेब देती हे, मेरी नजर  मुजे,
आया ना राश नाला-ए-दिल का असर मुजे,
अब तुम मिलें तो कुछ नही अपनी ख़बर मुजे,
डाला हे बे-खुदी ने अजब राह् पर मुजे,
आँखें है ओर कुछ नही आता नजर मुजे,
करना हे  आज हजरते-नाशेह से सामना,
मिल जाये दो घड़ी को तुम्हारी नजर मुजे,
यक्सान हे हुश्न-ओ इश्क की सर-मस्तियों का रंग,
उनकी ख़बर उन्हें हे ना अपनी ख़बर मुजे,
में दूर् हूँ तू रूहें -सुखन मुजसे किस लिए,
तुम पास हो तो क्यूँ नही आते नजर मुजे,
दिल लेके मेरा देते हो दागे "जिगर" मुजे,
ये बात भूलने की नही न उम्रभर मुजे

हर-सु दिखे देते हे, वो जल्वागर मुजे., क्या-क्या फरेब देती हे, मेरी नजर मुजे, आया ना राश नाला-ए-दिल का असर मुजे, डाला हे बे-खुदी ने अजब राह् पर मुजे, आँखें है ओर कुछ नही आता नजर मुजे, करना हे आज हजरते-नाशेह से सामना, मिल जाये दो घड़ी को तुम्हारी नजर मुजे, यक्सान हे हुश्न-ओ इश्क की सर-मस्तियों का रंग, उनकी ख़बर उन्हें हे ना अपनी ख़बर मुजे, में दूर् हूँ तू रूहें -सुखन मुजसे किस लिए, तुम पास हो तो क्यूँ नही आते नजर मुजे, दिल लेके मेरा देते हो दागे "जिगर" मुजे, ये बात भूलने की नही न उम्रभर मुजे

हर-सु दिखे देते हे, वो जल्वागर मुजे.,
क्या-क्या फरेब देती हे, मेरी नजर  मुजे,
आया ना राश नाला-ए-दिल का असर मुजे,
अब तुम मिलें तो कुछ नही अपनी ख़बर मुजे,
डाला हे बे-खुदी ने अजब राह् पर मुजे,
आँखें है ओर कुछ नही आता नजर मुजे,
करना हे  आज हजरते-नाशेह से सामना,
मिल जाये दो घड़ी को तुम्हारी नजर मुजे,
यक्सान हे हुश्न-ओ इश्क की सर-मस्तियों का रंग,
उनकी ख़बर उन्हें हे ना अपनी ख़बर मुजे,
में दूर् हूँ तू रूहें -सुखन मुजसे किस लिए,
तुम पास हो तो क्यूँ नही आते नजर मुजे,
दिल लेके मेरा देते हो दागे "जिगर" मुजे,
ये बात भूलने की नही न उम्रभर मुजे

Saturday, 5 May 2012

अब में राशन की कतारो में नजर आता हूँ,
अपने खेतों से, बिछडने की सजा पाता हूँ,
इतनी मेहंगाइ के  बाजार से कूछ लाता हूँ,
अपने बच्चो में  उसे बांट के शरमाता हु,
अपनी नींदो का लहू पोंछने की कोशीस में,
जागते -जागते थक जाता हूँ सोजाता हूँ,
कोई चादर समज के खिंच ना ले फीर से "खलिश,"
में कफन औढ के फूट-पाट पे सो जाता हूँ,

मंज़िल ना दे, चराग ना दे, हौसला तो दे,...
तिनके का ही,सही तू मगर आशरा तो दे,...
मेने ये कब कहा के मेरे हक्क में हो जवाब,
लेकिन खामोश क्यू हे तू,कोई फैसला तो दे,...
बरसो में तेरे नाम का, खाता रहा फरेब,
मेरे खुदा कहा हे  तू, अपना पता तो दे,
बेशक़ मेरे नसीब पे रख अपना इख्तीयार,
लेकिन मेरे नसीब में, क्या हे बता तो दे,
.खुदा हमको ऐसी ,खुदाई ना दे,.....
के अपने सिवा कुछ दिखे ना दे,.....
खातावार समजेंगी दुनिया तुजे,
अब इतनी ज्यादा सफाई ना दे,.....
हंसो आजितना के इस शोर में ,
सदा के सिवा कुछ सुनाई ना दे,
अभी तो बदन में लहू हे बहोत,
कलम छीन ले रोशनाई ना दे,....
खुदा ऎसे एहसास का नाम हे,
रहे साथ लेकिन दिखाई ना दे,

Friday, 4 May 2012

कभी देवी बना दीया, कभी माँ बना दीया,
कभी बेटी तो कही बहन बना दीया,
युगों से नारी को, जो चाहा मन बना दीया,
नारी को पत्नि ,पुरुष को परमेश्वर बना दीया,
युगों से पुरुष रुपी भेड़ियों ने नारी का शोषण
किया, ओर बाकी बचा तो इसे सामाजिक व्यवस्था का नाम दीया, 

ओर हिमाकत तो देखो पूरुषो की समाज सींचन का काम भी नारी के सर धरा, 
पता नही नारी कब जगेगी,
और अपने सामाजिक उत्थान में लगेगी,
तेरी ग़ज़ल को यु भी आजमाके देख,

प्यार हे जिंदगी से तो, अज़ल को भी अपनाके देख

ओर ले कभी ,मज़ा भँवर में भी, डूबने का,

मजधार में ख़ुद को, कभी यु ही लहराके देख,

कि तुने अभी टूटे सफिनौ पे सफर किया ही नहीं,

कस्ति में चलने वाले कभी, समंदर से उलज़ के देख,

किनारे पे बैठ के नहीं, लगते मोती किसी के हाथ ,

हुनर हे तो , गोता लगा, ओर ख़ुद को डूबा के देख.

ओर दीये के उजाले में , सब-कुछ सुनहरा हे " मुकेश"

हमारी तरहा अंधेरो में, भी कभी जगमगाके देख,

Thursday, 3 May 2012

कुत्ते में हे कितने गुण,
ले उससे भी कुछ जिने के गुर,
इनसान हो के इतना ना "इतरा",
जानवर से भी कुछ जीना सिख जां,
जहां हो वफादारी कुत्तों की दी जाती मिशाल,
जय-चंद विभीषण हे ,इंसान की संतान,
वैसे भी कुत्तों से ज्यादा नही किम्मत इनसान की
उसे डायरेक्ट खाना देता हे परवर-दीगार भी,
नही बोना धोना काटना, पड़ता हे बार-बार,
नही लगता खाने में उसे तड़का ,ओर अचार,
कच्चा भी हजम होता हे उसे ,
नही वैद- हकीम की जरूरत उसे,
गझब की दी हे "आका" ने उसे सूँघ ने की ताकत,
इनसान को दिखता हे वो हे रात में इनसान की औकात,
वो तो भौंकता हे, "चोर"को देखकर,
केहता हे इनसांकी औलाद अब तू सुधर,
अपने मालिक से रेहता हे वो वफ़ादार,
जां की भी बाजी लगता हे वो जानिसार,
हो शके तो तुम भी फेर लो कुत्ते की माला,
जीवनी सुधर जायेगी, हो जाओगे इनसान आला,
कुत्ते में हे कितने गुण,
ले उससे भी कुछ जिने के गुर,
इनसान हो के इतना ना "इतरा",
जानवर से भी कुछ जीना सिख जां,
जहां हो वफादारी कुत्तों की दी जाती मिशाल,
जय-चंद विभीषण हे ,इंसान की संतान,
वैसे भी कुत्तों से ज्यादा नही किम्मत इनसान की
उसे डायरेक्ट खाना देता हे परवर-दीगार भी,
नही बोना धोना काटना, पड़ता हे बार-बार,
नही लगता खाने में उसे तड़का ,ओर अचार,
कच्चा भी हजम होता हे उसे ,
नही वैद- हकीम की जरूरत उसे,
गझब की दी हे "आका" ने उसे सूँघ ने की ताकत,
इनसान को दिखता हे वो हे रात में इनसान की औकात,

वो तो भौंकता हे, "चोर"को देखकर,
केहता हे इनसांकी औलाद अब तू सुधर,
अपने मालिक से रेहता हे वो वफ़ादार,
जां की भी बाजी लगता हे वो जानिसार,
हो शके तो तुम भी फेर लो कुत्ते की माला,
जीवनी सुधर जायेगी, हो जाओगे इनसान आला,