Wednesday, 18 April 2012

हवा ओ पे वो नाम लिखदे,
फीज़ा ओमे वो पैग़ाम लिखदे,
जिनकी आगोश में हो रातें "सजी"
उनका ख्वाबों पे नाम लिखदे,
इस कदर दीवानगी का आलम बना,
दीवानो में तू भी अपना नाम लिखदे,
कोई लहर तो तेरी होगी,
उसको थाम उसपे अपना नाम लिखदे,
दील की आग हे, ना जिसमे "जाग" हे
उसे जलते रहेने का इनाम लिखदे
आफताब से निकल के, उजाला कुछ करेगी,
उस पे "किरन" का ' उन्वान" लिखदे,

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