i गुलौ में रंग भरे, बादलों-बाहर चले ,
चले भी आओ के हम्-संग कारोबार चले,
जो हम पे गुजरी तो, गुजरी मगर शबे हीजराह,
हमारे अश्क गिरे, आप बस संवार चले,
रस्ता ही रस्ता है, जिंदगी,
मंजिलों का बस्ता है,जिंदगी,
तन्हाइओ का हुजूम हर वक्त है,
जहा तक देखो खस्ता है,जिंदगी
हम-दर्द का भी दर्द तो दर्द हे आखिर,
दर्द से तंग कसा रस्सा है,जींदगी
चले भी आओ के हम्-संग कारोबार चले,
जो हम पे गुजरी तो, गुजरी मगर शबे हीजराह,
हमारे अश्क गिरे, आप बस संवार चले,
रस्ता ही रस्ता है, जिंदगी,
मंजिलों का बस्ता है,जिंदगी,
तन्हाइओ का हुजूम हर वक्त है,
जहा तक देखो खस्ता है,जिंदगी
हम-दर्द का भी दर्द तो दर्द हे आखिर,
दर्द से तंग कसा रस्सा है,जींदगी
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