वो सुबहा कभी तो आयेगी,.......
वो सुबहा कभी तो आयेगी,,,,,,,,,
इन काली सदियों के सर से,
जब रात का आँचल ढलकेगा,
जब दुःख के बादल पिघलेंगे,
जब सूख का सागर छलकेगा,
जब अंबर झुम के नाचेगा,
जब धरती नग्में गायेगी,...वो सुबहा,,,,,,,,,,
जिस सुबहा की खातिर युग-युग् से,
हम सब मर-मर कर जीते है,
जिस सुबहा के अमृत की धुन में,
हम झहर के प्याले पीते है,
इन भुखी-प्यासी रूहों पर ,
एक-दिन तो क्रम फरमायेगी,..वो सुबहा,,,,
माना के अभी तेरे मेरे ,
अरमानो की कीमत कुछ भी नही,
मिट्टी का भी है कुछ मोल मगर,
इंसानो की कीमत
No comments:
Post a Comment