Sunday, 30 September 2012


ओ,,,जा रे जां ओ हरजाई, देखी तेरी दिल-दारी,
दिल दे कर में कर बैठी दिल के दुश्मन से यारी
तुजको आँखों में भर के, मर गई में तुज पे मर गई,,
पत्थर की पूजा करके हारी में हारी,,जां रे
ओ  तेरे पिछे आँखें मीचे चल दी में दीवानी,
 हाये छौदके दुनिया सारी,, लोगों ने कितना समजाया ,
मेने एक ना मानी, मेरी मत गई थी मारी,
यूँ  ना कोई मरे, रब्बा खैर करे ओ,
हसी- हसी में फँस गई मेतो बे-चारी, जा रे जा,
बिन सोचे बिन जाने मेने,ओ रे ओ बेगाने,
 तुजे सौँप दीया जीवन को,
जैसे खुशबू नजर ना आए
रंग छुआ ना जाए वैसे ,

जान शकी ना तेरे मन को,
फिर भी चाहा तुजे , क्यू ना समजा मुजे,
बनके पहेली रह गई प्रित हमारी,, जां रे जां,,,





उइ माँ ,,उइ माँ ये क्या हो गया,,,
उनकी गली में दिल खो गया,,
बिंदिया हो तो ढूँढ भी लू में दिल ना ढूँढा जाए,
एक दिन की बात हे, नदिया किनारे,,
उनसे हुए थे छुप-छुप इशारे,,,,
कसम खा चुकी थी में प्यार ना करूँगी,
में प्यार का कभी भी करार ना करूँगी,,,,,
अब वो बातें हाये यार डर हे हो ना जाउ बरबाद,
शीशा हो तो तोड़ भी दु में, दिल ना तोड़ा जाए,
प्यार के रास्ते प्रिया बड़े ऊँचे-नीचे,,
आऊ मगर कैसे तेरे पिछे-पीछे,,,,,
ना ठेस लग जाए, घूँघट गिर जाए,,
घूँघट जो संभालू तो लत खुल जाए,,
मुशकील में हे मेरी जान,

तू क्या समजे  ओ नादान,,,,,
दुनिया हो तो छोड़ भी दु,,
में प्यार ना छोदा जाए,




साकीया,,,,,  आज मुजे नींद नही आयेगी,,,,
सुना हे तेरी महफिल में रत-जगा हे,,,,,,
आँखों आँखों में यूँ ही रात गुजर जायेगी ,,,,
सुना हे तेरी महफिल में रत-जगा हे,
शाकी हे और शाम भी , उल्फत का जाम भी,
तक़दीर हे उसी की जो ले उनसे काम भी,
रंगे महफिल हे रत भर के लिए,,,
सोचना क्या अभी सहेर के लिए,,,
तेरा जलवा हो तेरी सूरत हो,
और क्या चहियें नजर के लिए,,,,
आज सूरत तेरी बे -पर्दा नजर आयेगी,,,,
सुना हे तेरी महफिल में ,,,,,,,,,,,
मुहोब्बत में जो मिट जाता हे,,,
वो कुछ कैह् नही शकता,,,,
ये वो कूचा हे जहां दिल ,

दिल सलामत रह नही शकता,,,,,
किसकी दुनिया यहा तबाह नही,,,
कौन हे जिसके लब पे आह नही,,,,
वो सफर भी जरूर आयेगा ,,,,
जिससे बचाने की कोई राह् नही

Friday, 28 September 2012


मै हवा हूँ, कहा वतन मेरा,,,,,,,,,,,,,,,,
दस्त मेरा ना ये चमन मेरा,,,,,,,,,,,,,,,,
नजर नजर से गुजरना कमाल होता हे,
हर एक दिल में उतरना कमाल होता हे,
बुलंदी ओ पे पहुँचना अलग हे बात मगर,
बुलंदी ओ पे ठेहरना कमाल होता हे,
बर्गे गुल पर चराग सा क्या है,
छु गया था उसे , ज़हन मेरा,,,,,,,,,,,,,,,,,

मेरी मैयत पे कोई रोया है,,,
एक नाज़नीं की मैयत ओर ,
दुश्मनों के कांधे, काँटों पे जारहा हे ,
एक फुल का जनाजा,
हीचकीया ले के ना रो , कबर पे रोने वाले,
जाग जाए ना कही, चैन से सोने वाले,
मेरी मैयत पे कोई रोया है,,,
इस लिए जल गया कफन मेरा,,,,,,,,,,,,,,

में के टूटा हुआ सितारा हूँ,,,,
अल्लाह करे ज़ुल्फ तेरी, इतनी बड़ी हो,
ख़ुद तेरी ही बला तेरी ही गार्डन में पड़ी हो,
चुम लेती हे,कभी लब तू कभी यार दीदा,
तुमने ज़ुल्फों को  बहोत सर पे चढ़ा र्ख्खा हे,
अपने बालों, को तो लिल्लाह सँवारा कीजे,
हाये कंबख्त ये पीछॆ ही पड़े रेहते हे,
डस ना जाए मुजको जुल्फे कालिया,
खूब तुंने नगीने ये पालीया,
हे दोस्त साँप की मानिंद मुजसे लिपटे हुए ,
मेरा वजूद ही चंदन हे क्या किया जाए,,,,,,

तुम अगर गुलशन में जाना छोड़ दो,
तुम बाग से जब भी आते हो,,,
उतरा हुआ चेहरा होता हे,,
तुम रुख से नकाब उलटा ना करो,,
फूलों की नजर हो जाती हे
भूल जायेगी लचकना डालिया,
में के टूटा हुआ सितारा हूँ,,,,
अंजुमन -अंजुमन सुखन मेरा,,,,,,,,,,,,,
















Sunday, 16 September 2012


सुना था के वो आयेंगे अंजुमन में,
सुना था के उनसे मुलाकात होगी ,,,,,,
हमे क्या पता था, हमे क्या खबर थी,
ना ये बात होगी, ना वो बात होगी,,,,,,,
में केहता हूँ इस दिल को दिल में बसा लो,
वो केहते हे हमसे, निगाहे मिला लो,
निगाहों को मालूम क्या दिल की हालत,
निगाहों- निगाहों में क्या बात होगी,,,,,,,,
हमे खींचकर इश्क लाया हे तेरा,
तेरे दर पे हमने लगाया हे डेरा,
हमे होगा जब-तक ना दीदार तेरा,
येही सुबहा होगी, येही रात होगी,,,,,,,,
मुहोब्बत का जब हमने छेड़ा फँसना,
तो गोर से मुखा पे आया पसीना,
जो निकले थे घर से, तो क्या जानते थे,
के यूँ धूप में आज बरसात होगी,,,,,,,,,,,,,
खफा हमसे होके वो बैठे हुए हे,
रकीबों में घिर के वो बैठे हुए हे,
ना वो देखते हे,ना हम देखते हे,
यहा बात होगी, तो क्या बात होगी,,,,,





मर  मर के  जी  रहा  हूँ,
अच्छा  हे  मार  दे तू,
खंजर उठा के  मेरे,                                                                                           
दिल  में  उतार  दे  तू,
केहती  हे  मेरी  राहे .
तू  थाम मेरी  बाँहें,
दुनिया  के  रास्तों से,
मुजको  गुजार दे तू,
शफीनौ के सहारे, 
मिलें किसे साहीलो किनारे,                                                                                                             
अच्छा  हे इन  भँवर  में, 
मुजको उतार दे तू,
रख भरोसा "अज़ल" पे,
वो बा-वफ़ा हे हमसे,
ये मुस्ते-खाक दिल की,
उस पे निसार दे तु,

मर  मर के  जी  रहा  हूँ,  अच्छा  हे  मार  दे तू,                                                                                                                     खंजर  उठा के  मेरे  दिल  में  उतार  दे  तू,

केहती  हे  मेरी  राहे  ,तू  थाम मेरी  बाँहें,
दुनिया  के  रास्तों से,  मुजको  गुजार दे तु,

शफीनौ के सहारे , मिलेंगे क्या ,साहिलो  किनारे,                                                                                                               अच्छा  है , इन  भँवर  में,  मुजको  उतार  दे  तू

रख  उम्मीदें  "अजल"  से,  वो  बा-वफ़ा  हमसे,                                                                                                                      बाज़ार मे  जहा  के , जा  क्यू  उधार  दे  तू ,

"मुकेश" अपने  सर पे , तन्हाइयो का सलिब हे
अपनी मुस्ते-खाक  मिटटी, उस  पे  नीसार दे  तू

Tuesday, 4 September 2012


ये जिंदगी, ,,ये जिंदगी,,
ये जिंदगी आज जो तुम्हारे,
बदन की छोटी बड़ी नशों में मचल रही हे,
तुम्हारे पैरों से चल रही हे,
ये जिंदगी,,,ये जिंदगी,,,,,
तुम्हारी आवाज़ में गले से निकल रही हे,
तुम्हारे  लफ्जौ में ढल रही हे,,,,,,
ये जिंदगी,,,ये जिंदगी,,,
ये जिंदगी जाने कितनी सदियों से शक्लें बदल रही हे,,,
बदलती शक्लो, बदलते जिस्मो में,
चलता फिरता ये एक शरारा,,,,,
जो इस घड़ी नाम हे तुम्हारा,,,,
इसी से सारी चहल-पहल हे,
इसी से रोशन हर नजारा,,,
सितारे तोडों या घर बसा ओ,
अलम उठा ओ, या सर जुका ओ,
तुम्हारी आँखों की रोशनि तक हे खेल सारा,,,,,,
ये खेल होगा नही दुबारा,,,,,

Saturday, 1 September 2012


फिर नए जख्म बाज़ार से खरीद लायेगा,
दिल के बाज़ार से ये मुफ्त में मिल जयेगा,

मेने चाँद ओर सितारों की तमन्ना की थी,
मुजकोरातों की सियाही के सिवा कूछ ना मिला
में वो नगमा हूँ जिसे प्यार की,मेहफिलनामिली,
वो मुसाफिर हूँ जिसे कोई भी मंज़िल ना मिली
जख्म पये हे बहरों की तमन्ना की थी,
किसी गेसू किसी अंचल का सहारा भी नही,
रास्ते में कोई धुँधला सा सितारा भी नही,
मेरी नजरों ने नजरों की तमन्ना कि थी,
मेरी राहो से जुदा हो गयी राहे उनकी,
आज बदली नजर आती हे निगाहे उनकी,
जिनसे इस दिल ने सहारो की तमन्ना की थी
प्यार माँगा तो सिसकते हुए, अरमान मिले,
चैन चाहा तो उमड़ते हुए तूफान मिलें
डूबते दिल ने किनारों की तमन्ना की थी