यादों को सरे-शाम बुलाया नहीं करते,
हर रोज़ तो ये आग, लगाया नहीं करते,
ले दुबे जो दरीया , तुजे अपने ही भँवर में,
ऐसा कोई तूफान उठाया नहीं करते,
तन्हाइ को माशुक समज लेते हे जो लोग,
आया नहीं करते, कही जाया नहीं करते,
हर रोज़ तो ये आग, लगाया नहीं करते,
ले दुबे जो दरीया , तुजे अपने ही भँवर में,
ऐसा कोई तूफान उठाया नहीं करते,
तन्हाइ को माशुक समज लेते हे जो लोग,
आया नहीं करते, कही जाया नहीं करते,
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