Thursday, 19 April 2012











जब खनक उठ्ठे किसी शाख पे पत्ता कोई,,
गुड़-गुदाये तुम्हे बीता हुआ लम्हा कोई,
जब मेरी याद का बे-चैन पपीहा कोई,
जी को रह-रह के जलाये  तो  मुजे  खत् लिखना,........तुम को जब नींद.........
जब निगाहों के  लिए कोई नजारा ना रहे,
चाँद छुप जाए  गगन पर कोई तारा ना रहे,
भरे संसार में  जब कोई सहारा ना रहे,
लोग हो जाए पराये तो मुजे खत् लिखना..,.
जब मेरी याद सताये तो........

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