Monday, 9 April 2012


हालात मै-कदे के, करवट बदल रहे हे,
शाकी बहेक रहा हे मै-कश समहल रहे हे,
किसको बताये कबसे, हम जिंदगी के राही....
फूलों की आरज़ू में, काँटों पे चल रहे हे,
तुम सोख से मनाओ, जश्ने बहार यारों,
इस रोशनी से लेकिन, कुछ घर तो जल रहे हे,
पेहले तो मेरी कश्ती तूफान में छोड़ आए,
साहिल से अब ना जाने क्यूँ हाथ मल रहे हे,
ऐ हम सफर ये शायद , तुजको ख़बर नही हे,
कुछ हादसे भी मेरे, हमराह चल रहे हे,
कितने ग़मों को हमने, हँसकर छुपा लिया हे.,
कुछ गम"अमीर" लेकिन, अश्कों में ढल रहे हे,

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