Saturday, 14 April 2012


एहले  दिल यूँ भी निभा लेते हे,
दर्द सीने में छुपा लेते हे,..............
दिल की महेफिल में उजालो के लिए .,
याद की शम्मा जला लेते हे,............
जलते  मौसम में भी ये दीवाने,
कुछ हसी फुल  खिला लेते  हे,.........
जिनको जीना हे  मुहोब्बत के लिए,
अपनी हस्ती को मिटा लेते हे,..........
अपनी आँखों को बनाकर  ये जुबान ,
कितने  अफसाने  सुना लेते हे,लेते  हे, ........

No comments:

Post a Comment