Thursday, 19 April 2012

जब मेरी याद सताये तो मुजे खत् लिखना,
तुम को जब नींद ना आए तो,मुजे खत् लिखना,...
गीले पेड़ों की, घनी चाव में हँसता सावन,
प्यासी धरती में समाने को,तरसता सावन,
रात को छत पे  लगातार  बरसता सावन,
दिल में जब आग लगाए तो मुजे खत् लिखना,
तुमको जब नींद  ना आए तो मुजे खत् लिखना.....

जब खडक उठ्ठे किसी शाख पे पत्ता कोई,,
गुड़-गुदाये तुम्हे बीता हुआ लम्हा कोई,
जब मेरी याद क्ा बे-चैन पपीहा कोई,
जी को रह-रह के जलाये  तो  मुजे  खत् लिखना,.......
.तुम को जब नींद.........
जब निगाहों के  लिए कोई नजारा ना रहे,
चाँद छुप जाए  गगन पर कोई तारा ना रहे,
भरे संसार में  जब कोई सहारा ना रहे,
लोग हो जाए पराये तो मुजे खत् लिखना..,.
जब मेरी याद सताये तो........

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