Saturday, 12 November 2011
Friday, 11 November 2011
आहौ ने भी तो साथ , लबौ,का दीया नहीं,
आहौ ने भी तो साथ , लबौ,का दीया नहीं,
मेने ये दिल ,जलाने को ,क्या क्या किया नहीं,
में जी रहा हु, एक मौत के ही इंतज़ार में मर्जी से घडी भर यहा में जिया नही
गिरता रहा हर एक अश्क मेरा, जमीन पर, बढके किसी ने दामन आगे किया नही
एक मौत ही खफा है, हमसे नही तो क्या,.
वो कौन सा, जहर है जो मैंने पिया नही
मुकेश मुजे है याद, वो आज भी
दिल ले लेके बे-वफ़ा ने वापस किया नही
Thursday, 10 November 2011
आहौ ने भी तो साथ , लबौ,का दीया नहीं,
आहौ ने भी तो साथ , लबौ,का दीया नहीं,
मेने ये दिल ,जलाने को ,क्या क्या किया नहीं,
में जी रहा हु, एक मौत के ही इंतज़ार में मर्जी से घडी भर यहा में जिया नही
गिरता रहा हरेक अश्क मेरा जमीन पर, बढके किसी ने दमन आगे किया नही
एक मौt ही खफा है, हमसे नही तो क्या,. वो कौन सा, जहर है जो मैंने पिया नही
मुकेश मुजे है याद, वो आज भी शमा , दिल ले लेके बे-वफ़ा ने वापस किया नही
मेने ये दिल ,जलाने को ,क्या क्या किया नहीं,
में जी रहा हु, एक मौत के ही इंतज़ार में मर्जी से घडी भर यहा में जिया नही
गिरता रहा हरेक अश्क मेरा जमीन पर, बढके किसी ने दमन आगे किया नही
एक मौt ही खफा है, हमसे नही तो क्या,. वो कौन सा, जहर है जो मैंने पिया नही
मुकेश मुजे है याद, वो आज भी शमा , दिल ले लेके बे-वफ़ा ने वापस किया नही
आहौ ने भी तो साथ , लबौ,का दीया नहीं,
आहौ ने भी तो साथ , लबौ,का दीया नहीं,
मेने ये दिल ,जलाने को ,क्या क्या किया नहीं,
में जी रहा हु, एक मौत के ही इंतज़ार में मर्जी से घडी भर यहा में जिया नही
गिरता रहा हरेक अश्क मेरा जमीन पर, बढके किसी ने दमन आगे किया नही
एक मौt ही खफा है, हमसे नही तो क्या,. वो कौन सा, जहर है जो मैंने पिया नही
मुकेश मुजे है याद, वो आज भी शमा , दिल ले लेके बे-वफ़ा ने वापस किया नही
मेने ये दिल ,जलाने को ,क्या क्या किया नहीं,
में जी रहा हु, एक मौत के ही इंतज़ार में मर्जी से घडी भर यहा में जिया नही
गिरता रहा हरेक अश्क मेरा जमीन पर, बढके किसी ने दमन आगे किया नही
एक मौt ही खफा है, हमसे नही तो क्या,. वो कौन सा, जहर है जो मैंने पिया नही
मुकेश मुजे है याद, वो आज भी शमा , दिल ले लेके बे-वफ़ा ने वापस किया नही
मर मर के जी रहा हू
मर मर के जी रहा हूँ, अच्छा हे ,मार दे तू, खंजर उठा के मेरे दिल में उतार दे तू,
केहती हे मेरी राहे ,तू थाम मेरी बाँहें,
दुनिया के रास्तों से, मुजको गुजार दे तु,
शफीनौ के सहारे , मिलेंगे क्या ,साहिलो किनारे, अच्छा है , इन भँवर में, मुजको उतार दे तू
रख उम्मीदें "अजल" से, वो बा-वफ़ा हमसे, बाज़ार मे जहा के , जा क्यू उधार दे तू ,
"मुकेश" अपने सर पे , तन्हाइयो का सलिब हे
अपनी मुस्ते-खाक मिटटी, उस पे नीसार दे तू
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