मिला जिन्हें उन्हें , उस्तादगी से ,"उज " मिला,
उसी ने खाई हे ठोकर, जो सर उठाके चले,,,,,,,,,,,
तमाम उम्र जो की सबने बे-रुखी हमसे,
"कफन" में हम भी," अझीजौ" से मुँह छुपाके चले,
ग़लत हे शीकवा ए, दुश्मन के, बाद मरने के,
मेरे "अझीज" मुजे खाक में मिलाके चले
उसी ने खाई हे ठोकर, जो सर उठाके चले,,,,,,,,,,,
तमाम उम्र जो की सबने बे-रुखी हमसे,
"कफन" में हम भी," अझीजौ" से मुँह छुपाके चले,
ग़लत हे शीकवा ए, दुश्मन के, बाद मरने के,
मेरे "अझीज" मुजे खाक में मिलाके चले
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