करके बरबाद मुजे उसने ये फरमाया है,
जश्न मना ये तेरे प्यार का सरमाया है,
किस्मत ने दी हे मुजे ये कैसी विरानी,
जहा फुल तो फुल खार भी मुरझाया हे,
बनाके दुनिया जो भूल की हे तूने,
तेरे कितने मसलों को हमने सुलझाया हे,
कितने होंगे ओर दर-बदर तेरी चाहत में,
कितनो ने यहा तेरा नक्शे-कदम पाया हे
गर होंसलावर होता ,तो यु पर्दा-दारी न करत्ता,
बनाके हमको क्यू, तूने मुँह छुपाया हे,
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