Thursday, 12 April 2012

जब अंचल रात का लेहराये ओर सारा आलम सो जाए ,
तुम मुजसे मिलने शम्मा जल!कर ताज -महल में आजाना,.................
ये ताज-माहेल जो  चाहत की आँखों का सुनहरा मोती हे,
हर रात जहा दो रूहों की खमोशी जिंदा होती हे,
इस ताज के साये में आकर तुम गीत वफ़ा का दोहराना,
ऎसे में तुम मुजसे मिलने आजाना....

तन्हाइ हे जागी-जागी सी,माहौल हे सोया-सोया हुआ,
जैसे की तुम्हारे ख्वाबों में ख़ुद ताज-महल हे खॊया हुआ,
हो ताज महल का ख्वाब तुम्ही ये "राझ"ना मैंने पेहचाना,
 ऎसे में  तुम शम्मा,...........................
जो मौत मुहोब्बत में आए, वो जान से बढ़कर प्यारी हे,
दो प्यार भरे दिल रोशन हे, दो रात बहोत अंधीयारी हे,
तुम रात के  इस अंधीयारे में बस एक जलक दिखला जाना,................
एसेमे तुम मुजसे मिलने ताज -महल में आजा

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