इधर आओ एक्-बार फिर प्यार करले,
निगाहों से रुहोसे को सर-सार करले,
मुकद्दर को मिल-जुल के बेझार करले,
लबों को कही रह ना जाए शिकायत,
मुहोब्बत का पूर- जोश इजहार करले,
मुहोब्बत खुदा जाने क्या रंग लाये,
ये जौके-वफ़ा जाने क्या गुल खिलाये,....2
ये वकते जुदाइ ये बे-ताब मंज़र,
ना-जाने हमे कितनी रातें जगाये,...
ना शर्मा ओ एक-बार फिर प्यार करले........
उखड़ ने को हे शब् की ज़ुल्मत का डेरा,
बरसने को हे आसमा का सवेरा,...2
ना कोशे मुहोब्बत जो पढ़ना हे पढले,
कहा फिर ये किस्मत में रोशन अंधेरा,
अभी वक्त हे आओ..फिर प्यार करले,........
पसीना जबीं पे हे शर्मा रही हो,
शहेर के तसव्वुर से गबरा रही हो,...... 2
ये आँखों में सौखी ये सीने की धड़कन,
कदम रुक रहे हे मगर जां रही हो,
जो रुक जाओ तो एक-बार फिर प्यार करले,
इधर आओ...............
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