Tuesday, 27 November 2012


कभी कहा ना किसी से तेरे फसाने को,,,,
ना जाने कैसे ख़बर हो गइ, जामाने को,,,,,
सुना हे गैर की महफिल में तुम ना जाओगे,
कहो तो आज सजालु गरीब खाने को,,,,,,
दुआ बहार मांगी तो इतने फुल खिले,
कही जगह ना मिली मेरे आशीयाने को,,,,,
दबा कर कब्र में सब चल दीये, ना दुआ ना सलाम,
जरा सी देर में क्या हो गया जमाने को,,,,,,,
अब आगे इसमे तुम्हारा भी नाम आयेगा,
जो हुक्म हो तो छोड़ दु ये ही फसाने को,,,,,,

"कमर"जरा भी नही तुमको खौफ-ए-रूसवाई,,,
के चाँदनी में चले आज उसे मनाने को,,,,,


ना उड़ा यूँ ठोकरों में, मेरी खाके कब्र जालिम,
बस येही एक रेह गई हे , मेरे प्यार की निशानी,,,,,
तुजे पेहले ही कहा था,हे जहां हे ,सराये फ!नी,
दिले बड़-नसीब तूने मेरी बात ही ना मानी,
सोचते ओर जागते, सांसो का एक दरीया हूँ में,
अपने गुम-गस्ता किनारों के लिए बेहता हूँ में,,,,,,,,,,,

कभी कहा ना किसी से तेरे फसाने को,
ना जाने कैसे ख़बर हो गई जमाने को,,,,,,,
सुना हे गैर की महफिल में तुम ना जाओगे,
कहो तो आज सज़ा लू गरीब खाने को,,,,,,,,,,,,,,

जल गया सारा बदन इन मौसमों की आग में,
एक मौसम रूह का हे जिसमे अब जिन्दा हूँ में,,,
मेरे होठों का तब्स्सुम दे गया धोखा तुजे,
तूने मुजको बाग जाना, देखले सहरा हूँ में,,,,,,,,,,,

देखिये मेरी पझीराइ को अब आता हे कौन,
लम्हा भर को वक्त की देहलीज पर आया हूँ में,,,
इसका रोना नही कयूँ तुमने किया दिल बरबाद,
इसका गम हे बहोत देर में बरबाद किया,,,,,,,,
मुजको तो होश नही, तुमको ख़बर हो शायद,
लोग केहते हे की तुमने मुजे बरबाद किया,,,,,,,,,,,,





Monday, 26 November 2012


रेत पर लीख्खा खवाब ओर आँखें , उसी में छोड़ गए,
वो अलग ही दीवाने थे, ख़ुद को कहां-कहां छोड़ गए, mukesh joshi

दश्त ए तन्हाई में ऐ जाने जहां लरज़ा है
तेरी आवाज़ के साए तेरे होंठों के सराब
दश्त ए तन्हाई में दूरी के ख़सो - खाक़ तले
खिल रहे हैं तेरे पहलू के समन और गुलाब

उठ रही है कहीं क़ुरबत से तेरी सांस की आंच
अपनी ख़ुशबू में सुलगती हुयी मद्धम मद्धम
दूर उफ़क़ पार चमकती हुयी कतरा कतरा
गिर रही है तेरी दिलदार नज़र की शबनम

इस क़दर प्यार से ऐ जाने जहां रक्खा है
दिल के रुखसार पे इस वक़्त तेरी याद ने हाथ
यूँ गुमां होता है गरचे हैं अभी सुबह ए फ़िराक
ढल गया हिज्र का दिन आ भी गयी वस्ल की रात

दश्त एक तन्हाई में ऐ जाने जहां लरज़ा है
तेरी आवाज़ के साए तेरे होंठों के सराब

रेत भरी हे, इन आँखों में आंसु से धो लेना ,,,,,,,,,,,,,,,,,,
कोइ सूखा पेड़ मिलें तो, उस से लिपट के रो लेना.,,,,,,,,,,
उसके बाद बहोत तन्हा हो, जैसे जंगल का रास्ता,
जो भी तुमसे प्यार से बोले, साथ उसी के हो लेना,,,,,,,,,,,,
कुछ तो रेत की प्यास बुजा ओ, जनम-जनम की प्यासी हे,
साहिल पर चलने से पेहले, अपने पाव भीगो लेना,,,,,,,,,,,
मेने दरीया से सीखी हे, पानी की पर्दा-दारी,
ऊपर-ऊपर हँसते रेहना, गहेराइ  में रो लेना,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

Sunday, 25 November 2012

आज भी मैंने कई इंसान देखे ।
रूबरू उनके कई तूफ़ान देखे ॥

मुस्कुराते मिन्नते करते जो आए
बन गए मालिक कई मेहमान देखे ॥

बेवफ़ाई के कई दीवान पढकर
इश्क में लुटते कई सुल्तान देखे ॥

शहर में पैगम्बरों का वेश धरकर

ज़िबह करते जो कई शैतान देखे ॥

इस सियाही रात में शमाँ लेकर
जगमगाते जो कई ईमान देखे ॥

'दास' का कहना न मानो, सोचिए खुद
भीड में शामिल कई नादान देखे ॥

कैसे छुपाउ राज-ए-गम,
दीदा-ए-तर, को क्या करु,,,,,,,,,,,
दिल की तपिश को क्या करूँ,
चश्म-ए-नम को क्या करु,,,,,,,,,,,,
हाल मेरा जब बदतर तब ना हुइ, तुम्हे ख़बर,,,,
बाद मेरे हुआ असर, अब में असर को क्या करूँ,

महोब्बत एक हकिकत हे, ये अफसाना नही होता,
कभी अपनी खुशी से कोई दीवाना नही होता,
हसी जलवों का मरकज हे जहां तुम सजदा करते हो,
वहां काबा नही होता, के बूट खाना नही होता,
 करमहे उन खयालो का जो दिल बेहलाये रखते हे,
भला किसके तसव्वुर में सनम खाना नही होता,
जो एहले जर्फ होते हे, ब-कदरे जर्फ पीते हे,
छलक जाता हे जो, वो उनका पैमाना नही होता
नजर का हुश्न भी सामिल हो, पैमानों में ए- रिन्दों,
जहां साकी नही होता, वो मै खाना नही होता,

महोब्बत की परस्तीस के लिए एक रात काफी हे,
सुबहा तक जिन्दा रह जाए, वो परवाना नही होता,
तसव्वुर को भी ए-"सादाब" हम अपना समजते हे,
जो देते हे तसल्ली दिल को, दे-दाना नही होता,

Saturday, 24 November 2012


सादगी तो हमारी जरा देखिये,
एतबार आपके वादे पर कर दीया
बात तो शीर्फ एक रात की थी मगर,
इंतज़ार आपका उम्रभर कर लिया,..........
इश्क में उलजने पेहले ही कम न थी,
ओर
लोग डरते हे कातिल की परछाईं से,
हमने कातिल के दिल में भी घर कर दिया,,,,,,,,,
जिक्र इक-बे-वफ़ा ओर  सितम ग़र का था,

तेरे आदाब की रुदाद हो गए हे हम,
बड़े ख़ुलूस से बरबाद हो गए हे हम,,,,,,

Friday, 23 November 2012


चंद लफ्ज़ों में बया नही होगा,
कागजों कलम कद नही रखते ,
ओर सिमट जाए तो शीर्फ ढाई लफ्ज काफी हे,
वो किताबों की दरकार नही करते,,,,,,,,,,,,,,,,,mukeshjoshi,,,,
हम बुतों को जो प्यार करते हे,
नकले परवर-दीगर करते हे,
क्या महोब्बत भी कोई पेशा हे,
लोग क्यूँ इतने प्यार करते हे,
इतनी क़समें ना खाओ गभराकर,
जाओ हम एतबार करते हे,
क्या अदा निसार होने की ,
उन से पेहलू बचा रहा हूँ में,
कितनी पुख्ता हे मेरी नादानी,
तुजको तुजसे छुपा रहा हूँ में,

Thursday, 22 November 2012


ना-जाने ये किस-किस का करज-दार हूँ में,
रब जाने कैसे-कैसे गुनाह् का गुनाह्-गार हूँ में,
एक मुद्दत हो गई ,ख़ुद को में पुरा,
तन्हा भी नही कर पाया,
या समजलु के मेरा दामन उसे भी राश ना आया, ,,,,,,,mukesh joshi,,,,,
मेरी तन्हाइओ तुम यूँ लगालो मुजको सीने से,,,,,,
के में गभरा गया हूँ इसतरहा रो-रो-के जिने से,,,,,,
ये आधी रात को फिर चूडि़यां सी क्या खनकती हे,
कोई आता नही,या मेरी ही जंजीरें जनकती हे,
ये बातें किस तरहा पूछूं सावन के महीने से,,,,,,,,,,,
के में गभरा गया हूँ इसतरहा रो-रो-के जिने से,,,,,,,,,,

पी ने दो, मुजे अपने ही लहू का जाम पीने दो,
ना सीने दो किसी को भी मेरा दामन ना सीने दो,
मेरी वहेशत ना बढ़ जाए कही, दामन के सीने से,,,,,,,,
के में गभरा गया हूँ इसतरहा रो-रो-के जिने से,,,,,,,,


तुम बिन जीवन, कैसा जीवन,
फुल खिले तो, दिल मुरझाये,
आग लगे जब बरसे सावन,
तुम बिन जीवन,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
रूठे तुम ज़ब से प्रिया,
सुना सा हे मन का डेरा,
बैरी हे दुनिया बाँटे कोई क्यूँ दुःख; मेरा,
अपने आंसु अपना ही दामन.,,,,,,,,
तुम बिन,,,जीवन,,,,,,,,,,
कैसे दिल बेहले, हँसना चाहूं रोना आए,
ढूँढा जग सारा,
कुछ ना सूजे कुछ ना भाये,
तोड़ गए तुम मन का दर्पण,,,,,,
किसको समजाउ,
गुजरी क्या-क्या, बिती क्या-क्या,
पूछें ये दुनिया, किसके हाथों ये दिल टूटा,
हाल हुआ ये किसके कारण,,,,,,
तुम बिन जीवन,,,,,,,,,,,,,,,,

Wednesday, 21 November 2012


मै ने देखे हे सभी रंग दुनिया के,
अरे हां ये दुनिया बड़ी रंगीली,
ता ता री रा तारा ता री रा री रा रा,,
मैंने देखे है सभी रंग दुनिया के,,,,,,,,,,,
दुनिया में चलो अकेले, अपने हो अरमान,
अपने हिस्से की वो धरती अपना आसमान,
अंबर पे उड़ी हूँ में दुनिया से,,,  अरे हां,
ये दुनिया ये दूनीया, लगे अंबर से नीली,,,,,,,,
दुनिया के खजाने सबको दे हम दीवाने,
लेना उतना ही जितना,
दे सकते  हो कहे सयाने,
दिल की सोचो में खोट ना हो, ये दनियाँ,
ये दुनिया बड़ी सजीली,
दो दिल मिलकर देखे, प्यार के सपने सुहाने,

जब अंबर जोड़े रीश्तो को क्या फिकर हे तुम्हे जमाने,,,
दो चाहने वाले मिल जाए अरे हां ये दुनिया,
ये दुनिया बड़ी रसीली,
घुँटने से ओर निखरता, हे प्यार का रंग अनमोल,
मेरे हिस्से में आया कितना, बैठ करूँ क्या गौर,
ये चार दीनों का मेला हे, अरे हां, ये दुनिया,
ये दुनिया रंगीन पहेली,,,,,,,




Tuesday, 20 November 2012


कोई सहरी बाबु, दिल लेहरी बाबु,
हाइ रे,, पग बाँध गाया घुँघरू,
में छम-छम नचदी फिरा,,

मैं तो चलूँ हौले-हौले


फिर भी मन डोले हाय रे
मेरे रब्बा मैं की कराँ

मैं छम-छम नचदी फिराँ
कोई सहरी बाबू
दिल-लहरी बाबू हाय रे
पग बाँध गया घुँघरू
मैं छम-छम नचदी फिराँ

( पनघट पे मैं कम जाने लगी
नटखट से मैं शरमाने लगी ) -२
धड़कन से मैं घबराने लगी
दरपन से मैं कतराने लगी
मन खाये हिचकोले
ऐसे जैसे नैया डोले हाय रे
मेरे रब्बा मैं की कराँ

मैं छम-छम नचदी फिराँ
कोई सहरी बाबू
दिल-लहरी बाबू हाय रे
पग बाँध गया घुँघरू
मैं छम-छम नचदी फिराँ
( सपनों में चोरी से आने लगा
रातों की निंदिया चुराने लगा ) -२
नैनों की डोली बिठा के मुझे
ले के बहुत दूर जाने लगा
मेरे घुँघटा को खोले
मीठे-मीठे बोल बोले हाय रे
मेरे रब्बा मैं की कराँ

मैं छम-छम नचदी फिराँ
कोई सहरी बाबू
दिल-लहरी बाबू हाय रे
पग बाँध गया घुँघरू
मैं छम-छम नचदी फिराँ

Monday, 19 November 2012


सेह लुंगी सितम तुमसे में सीकवा ना करूँगी,
मिट जाऊँगी में प्यार को रुस्वा ना करुंगी,
मेने दीलदार तुजे दिल में बसा रख्खा हे,
मेने जन्मो से तुजे अपना बना रख्खा हे,
तु मुजे लाख सता, तू मुजे लाख जला,
मुजसे कोई बात ना कर, गैर से आँख मिला,
मेने दिलदार तुजे दिल में बसा रख्खा हे,,,
मेने जन्मो से तुजे अपना बना रख्खा हे,
हमसफर तू हे मेरा, साथ छोड़ूँ ना तेरा,
तुम रहो लाख सनम दूसरों की बाँहों में,
मेरे हम-दम रहो लेकिन मेरी निगाहों में,
तू हमे लाख पराया या बेगाना समजे,
हम तो मिट जायेंगे मेहबूब तेरी राहो में,

तू करे लाख जफा में ना छोड़ूँगी वफा,
खुश रहो मेरे सनम दिल से निकलेगी दुआ,
मेने तुजे दिल के जरौखे में बिठा रख्खा हे,
तेरी तसवीर को पलकों में छिपा रख्खा हे,
गम नही प्यार में अगर जान चले जयेगी,
मरके भी रूह मेरी चैन नही पायेगी,
मुजको ए मेरे सनम तेरी महोब्बत की कसम,
मेरी मिट्‍टी से भी येही सदा आयेगी,

तू मेरी माँग सजा, मुजको दुल्हन तू बना,
वक्ते रुख़सत हे मेरा मुजको डॉली में बिठा,
तेरी उल्फत के सिवा दुनिया में क्या रख्खा हे,
तेरी हर  याद को सीने से लगा रख्खा हे,
हमसफर तू हे मेरा, साथ छोड़ूँ ना तेरा,
मेने दिलदार तुजे दिल में बसा रख्खा हे,


Sunday, 18 November 2012


जिंदगी इस कदर किसी का इंतेहा ना ले,,,,,
जो मर रहे हे, उनको जिने की दुआ ना दे,,,,
जब दफन हे खाक में उस ज़ीस्त का वजूद,
बुजती हुई चिनगारी को फिर से हवा ना दे,,,,

न पूछो हिज्र ने क्या क्या हमें जलवे दिखाए हैं
इधर आँखों में अश्क़ आए उधर हम मुस्कुराए हैं

तमन्ना, तू तो थी मासूम, तुझ से क्या गिला शिक़वा
कि जो भी दिल पे टूटे, चर्ख़ ने वो ज़ुल्म ढाए हैं

अजब शय है मुहब्बत भी, सिखा जाती है क्या क्या कुछ
हंसी लब पर है और पलकों तले दरिया छुपाये हैं

शब-ए-हिज्राँ ये मत पूछो, कि क्या क्या दिल पे गुज़री है

कि लिख कर जाने कितने ख़त उन्हें ख़ुद ही जलाए हैं

किसी के दर पे सौ सौ बार यूं बैठे हैं जा जा कर
कोई देखे तो ये समझे, कि उस के ही बुलाए हैं

कोई उम्मीद अब ऐ आसमाँ तुझ से नहीं मुझ को
तेरी रहमत से आखिरकार अब हम बाज़ आये हैं

कभी इक बार तू भी 'मीत' ले ले इम्तिहाँ उस का
सुना है इश्क़ ने भी आसमाँ क्या क्या झुकाए हैं

__________________________________ मीत

भुल जा मेरे दिल, भुल जा मेरे दिल,
शोलों पे आशियाना कोई बना सका ना,
बेहतर हे भुल जाना,,,,,,,,,, भुल जा,,,,,,,,,,,,
कोई पत्थर किसी आयने का,
दोस्त होता नही दिल दीवाने,
तू ना जाने दिल दीवाने,,,
डूबती कस्ती ओ को कभी भी,
कोई तूफां ना आया बचाने,
तू ना जाने दिल दीवाने,,,
हे प्यार एक फँस!ना, जो सच कभी हुआ ना,
बेहतर हे भुल जाना,,,,,

आग बुजती नही आँसू ओ से,
रेत में फुल खिलते नही हे,
तू  ना जाने दिल दीवाने,
पिछली राहों के बिछड़े मुसाफिर,
अगली राहो में मिलते नहीं हे,
तू  ना जाने दिल दीवाने,
अपनो से फरेब खाना,
दस्तुर हे पुराना,,,,,
बेहतर हे भुल जाना,,,,,,

एक-तरफा मोहब्बत किसीको,
राश आई नही  दिल दीवाने,
तू ना जाने दिल दीवाने,
तूने ढूँढे अंधेरों में तारे,
ओर हवाओं पे लिख्खे फँसाने,
तू ना जाने दिल दीवाने,
अब छोड़ो ये फसाना,
बीता हुआ जमाना,,,
बेहतर हे भुल जाना,,,,,



मेने मासूम बहरों में तुम्हे देखा हे,,,
मेने पुर नूर सितारों में तुम्है देखा हे,,
मेरे मेहबूब तेरी पर्दा-दारी की कसम,
मेने अश्कों की कतारों में तुम्हे देखा हे,,,,,,
जोर लगते गए फँसाने में,
राज खुलते गए छुपाने में,
रूठ ने का सबब तो तुम जानो,
हम तो गूम हे मनाने में,
तुने दिल के समज फूँक दीया,
मेरी दुनिया थी आसीयाने में,
मुजे शिकवा नही बरबाद रख, बरबाद रेहने दे,
मगर लिल्लाह मेरे दिल में अपनी याद रेहने दे,
बे-ख़ुद किए देते हे,,अंदाज़ हीजाबाना,
आ दिल में तुजे रखलु, ए जलवा-ए-जनाना,
क्या मेरी बात का यकीन नही,
कोई भी आपसा हसीन नही,
बे-जिजक दिल में तुम चले आ ओ,
इस मकाँ में कोई भी मकीन नही,
ए सर्-मन-ए नाज़नीं, 
मन अज मन चे दीदा इन,
एक बार पेहरे अज मन ए इसकी बुरी डारी,
तुजसा हसीन नही, नही तेरी मिसाल हे,
तेरा जमाल ए-न खुदा का जमाल हे,
क्यूँ  आँख मिलाइ थी, क्यूँ आँख लगाई थी,
क्यूँ रुख को छुपा बैठे, करके मुजे दीवाना,,
माना के मेंले मनहूँ,  
अब रुख ना छुपाना करके मुजे दीवाना,
जिस जां नजर आते हो, सजदे वही करता हूँ,
ईस से नही कुछ मतलब, काबा हो या बुत-खाना,
मालूम हक़ीक़त हो, जब मेरे जनाजे की,
तू शम्म-ए बनेगा 

Friday, 16 November 2012


  • हँस के फ़रमाते हैं वो देख कर हालत मेरी
    क्यों तुम आसान समझते थे मुहब्बत मेरी

    मैंने आग़ोश-ए-तसव्वुर में भी खेंचा तो कहा
    पिस गई पिस गई बेदर्द नज़ाकत मेरी

    आईना सुबह-ए-शब-ए-वस्ल जो देखा तो कहा
    देख ज़ालिम ये थी शाम को सूरत मेरी

    यार पहलू में है तन्हाई है कह दो निकले
    आज क्यों दिल में छुपी बैठी है हसरत मेरी

    हुस्न और इश्क़ हमआग़ोश नज़र आ जाते
    तेरी तस्वीर में खिंच जाती जो हैरत मेरी

    किस ढिटाई से वो दिल छीन के कहते हैं 'अमीर'
    वो मेरा घर है रहे जिस में मुहब्बत मेरी

    :: अमीर मीनाई ::


तिश्नगी आब आप हो जाए,
वादा-नुशी शवाब हो जाए,
तुम अगर मुस्कुराके जाम भरो,
सादा पानी शराब हो जाए,
साकी से भरके जाम लिया,
जब हमने ये सुना के ये पीना हराम हे,
अल्ला मिया का नाम लिया ओर पी गए,,
पत्थर के जिगर वालों,गम में वो रवानी हे,

ख़ुद राह् बना लेगा, बेहता हुआ पानी हे,,,,,,,,,,,
मै खाने की ए-साकी एसी रुत् ये सुहानी हे,
हर एक के सागर में, अंगूर का पानी हे,,,,,,,,,,,,
क्यूँ चाँदनी रातों में,दरीया में  नहाते हो ,
सोये हुए पानी में, क्या आग लगानी हे,,,,,,,,,,,,,
जब देखके छुपते थे, अब देखते हे छुपके,
वो दौरे लडक-पन का, ये दौरे जवानी हे,,,,,,,,,,,
इस जेहन-ए-परिशॉ में, एक फुल सा चेहरा हे,
पत्थर की हिफाज़त में, शीशे की जवानी हे,,,,,,,,,
मुमकिन ही नही मिलना तुम शम्मा में सुरज हूँ
में दिन का मुसाफिर हूँ, तू रात  की  रानी हे,,,,,,,,

कश्मीर की वादी में, बे-पर्दा जो निकले हो,
बर्फीलो पहाड़ों में, क्या आग लगानी हे,,,


गुलशन की फकत फूलों से नही,
काँटों से भी ज़ीनत होती हे,
जिने के लिए इस दुनिया में,
गम की भी जरूरत होती हे,,,,,
ए वाइसे नादा करता हे,
तू एक कयामत का चर्चा,
यहा रोज़ निगाहे मिलती हे,
यहा रोज़ कयामत होती हे,
वो  पुर्सीश-ए-गम को आए हे,
कुछ कैह् ना शकु, चुप रह ना शकु,
ख्वाहीस नम मुश्किल हे,
केह दु तो शिकायत होती हे,,,
करना ही पड़ेगा जब्ते गम,
पीने ही पड़ेंगे ये आँसू,
फरियादो को माजी कैह् देना,
तौहीने मोहब्बत होती हे,,,,,,
जो आके रुके दामन पे सबा,
वो अश्क नही हे पानी हे,
जो अश्क ना छलके हौथोसे,
वो अश्क की कीमत होती हे,,,,
गुलशन कि फ़क़त फूलों से नहीं काटों से भी जीनत होती है,
जीने के लिए इस दुनिया में ग़म कि भी ज़रूरत होती है.

ऐ वाइज़-ए-नादां करता है तू एक क़यामत का चर्चा,
यहाँ रोज़ निगाहें मिलती हैं यहाँ रोज़ क़यामत होती है.

वो पुर्सिश-ए-ग़म को आये हैं कुछ कह ना सकूं चुप रह ना सकूं,
खामोश रहूँ तो मुश्किल है कह दूं तो शिक़ायत होती है.

करना ही पड़ेगा जब्त-ए-अलम पीने ही पड़ेंगे ये आंसू,
फरियाद-ओ-फुगाँ से एय नादाँ तौहीन-ए-मोहब्बत होती है.

जो आके रुके दामन पे 'सबा' वो अश्क नहीं है पानी है,
जो अश्क ना छलके आंखों से उस अश्क कि कीमत होती है.

Wednesday, 14 November 2012


एक कतरा जब अश्क का दिल से जुदा होता हे,
तब मान लो आस्माँ से सिहर के खुदा रोता हे,,,,,,,,,,,,,

एक कतरा जब अश्क का दिल से जुदा होता हे,
तब मान लो आस्माँ से सीहर के खुदा रोता हे,,,
आँखों को तो मिल जाता हे बहाना नहाने का,
दिल मसल के ख़ुद को एक-एक कतरा अपने बहाने का,,,,

Saturday, 10 November 2012


ए शम्मा तू इतराती है, ख़ुद में जलकर अपनी रोशनी पे,
ये रात भर का हुश्न है, कुछ देर में सवेरा होगा,
और बिखरे होंगे कुछ रंग-बी रंगी पंख परवानो के,तेरी ही जद में, सवेरा मुस्कुरायेगा तेरे दिल की कालीप पे,

Friday, 9 November 2012


चांदी का बदन सोने की नजर,
उस पर ये नज़ाकत क्या कहीये,
किस-किस पे तुम्हारे जलवों ने,
छोड़ी है कयामत क्या कहिये, हे जी क्या कहिये,,,
गुस्ताख जुबाँ गुस्ताख नजर,
ये रंगे तबीयत क्या कहिये,
ऐसे भी कही इस दुनिया में ,
होती हे महोब्बत क्या कहिये,,,,,,
आँचल की धनक से साये में,
ये फुल गुलाबी चेहरों के,
ये गुल भी हे गुल्शन भी हे,
और खार हे गुलमत भी,ये गुल भी हे गुल्शन भी हे,
इस वक्त हमारी नजरों में,
क्या चीज हे जन्नत क्या कहिये,

नजरों में नजरों में,,,,
तुमसे नजरे जो मिली,
दिलो दुनिया से गए,
इक तमन्ना के सीवा,
हर तमन्ना से गए,
मस्त आँखों से जो पी,
जामो मीना से गए,
जुल्फ लेहराइ जहा,
हम भी लेहराते गए,
नूर मिलती हे जिसे,
इसकी परवाह से गए,
इस वक्त हमारी नजरों में ,
क्या चिज हे जन्नत,
क्या कही ये,

यु गर्म निगाहे मत डालो,
ये जिस्म पिघल भी शकते है,,,,
ये नही रुप की शबनम,
रंग निगाह डालो मध्यम,
आदाब-ए- नजारा भुले हो,
तुम लोगो की वहेशत क्या कही ये,
तुम हमे देख शको, इसका इमकान नही,
ख़ुद को बदनाम करे, हम वो नादान नही,
कोई मरता हे मरे , हम पे एहसान नही,
तुमसे क्यू बात करे, तुमसे पेहचान नही,,,
जिन लोगो को तुम ठुकराके चलो,
वो लोग भी किस्मत वाले हे,


Tuesday, 6 November 2012


जाने क्या ढूँढती रेहती है ये आँखें मुजमे,
राख के ढेर में शोला हे ना चिंगारी है,,,,
अब ना वो प्यार ना उस प्यार की यादें बाकी,
आग यूँ दिल में लगी कुछ ना रहा कुछ ना बचा,
जिसकी तसवीर निगाहों में लिए बैठी हो,
में वो दिलदार नही, उसकी खामोश चिता,
जिंदगी हँस के गुजरती तो बहोत अच्छा था,
खैर हँस के ना सही रोके गुजर जायेगी,
राख बरबाद महोब्बत की बचा रख्खी हे,
बार-बार इसको जो छेड़ा तो बिखर जायेगी,,,
आरज़ू जुर्म वफ़ा जुर्म, तमन्ना हे गुनाह्,
ये वो दुनिया हे जहां प्यार नही हो शकता,

कैसे बाज़ार का दस्तूर तुम्है समजाउ,
बिक गया जो वो खरीदार नही हो शकता,



Saturday, 3 November 2012


दिन गुजर गया एतबार में,
रात कट गई इंतज़ार में,,,,
वो मजा कहा वस्ले-यार में,
लुत्फ जो मिला इंतज़ार में,,,,,,,
उनकी एक नजर काम कर गई,,
होश अब कहा होशे-यार में,,,,,,
मेरे हासीले कायनात हे,
में हूँ आपके इख्तेयार में,,,,
आँख जो उथ्थी, उनकी तरफ़,
दिल उलज गया हुश्ने खार में,,
तुजसे क्या कहे कितने गम सहे,
हमने बे-वफ़ा तेरे प्यार में,
फिकरे आशियाँ हर खिजाँ में थी,
आशियाँ जला गर बहार में,,,,,,,,
किस तरहा ये गम भूल जाए हम,
वो जुदा हूँआ इस बहार में,

Friday, 2 November 2012


चाँद आहे भरेगा, फुल दिल थाम लेंगे,
हुश्न की बात चली तो, सब तेरा नाम ही लेंगे,,
ऐसा चेहरा हे तेरा , जैसे रोशन सवेरा,
जिस जगह तू नही हे, उस जगह हे अन्धेरा,
कैसे फिर चैन तुज-बिन तेरे बदनाम लेंगे,,,,
आँखें नाजुक सी कलिया,बातें मिसरी की डलियाँ,
होँठ गंगा के साहिल,,,जुल्फे जन्नत की गलियाँ,
तेरी खातिर फरिश्ते ,सर पे इल्ज़ाम लेंगे,,,,

चुप ना होगी हवा भी, कुछ कहेगी घटा भी,
और मुमकिन हे तेरा जिक्र करदे खुदा भी,
फिर तो पथ्थर ही शायद जब्त से काम लेंगे,,,



चमकते चाँद को टूटा हुआ तारा बना डाला,
मेरी आवारगी ने मुजको आवारा बना डाला,
बड़ा दिल कश, बड़ा रंगीन हे ये शहेर केहते हे,
यहा पर हे हजारों घर, घर में लोग रेहते हे,
मुजे इस शहेर ने गलियों का बंजारा बना डाला,
में इस दुनिया को अक‍सर देखकर हैरान होता हूँ
ना मुजसे बन शका छोटा सा घर दिन-रात रोता हूँ,,,
खुदाया तूने कैसे ये जहां सारा बना डाला,
मेरे मालिक मेरा दिल क्यू तड़पता हे सुलगता हे,
तेरी मरजी तेरी मरजी पे किस का जोर चलता हे,
किसी को फुल किसी को तूने अंगारा बना डाला,
येही आगाज था मेरा,ये ही अंजाम होना था,
मुजे बरबाद होना था, मुजे नाकाम होना था,
मुजे तक़दीर ने तक़दीर का मारा बना डाला,

मरने के बाद भी मेरी आँखें खुली रही,
आदत पड़ी हुई थी इन्हे इंतज़ार की,
जब तुजे दिल से भुलाने की कसम खाई हे,
और पेहले से भी ज्यादा तेरी याद आई हे,,,,,,
चाँद  अंगड़ाइयाँ ले रहा हे,
चाँदनी मुस्कुराने लगी हे,,,
एक भुली हुई सी कहानी ,
फिर मुजे याद आ ने लगी हे,,,,

किस ने बिखरा दीये अपने गेंसु,
अब घटा और छाने लगी हे,
तोबा-तोबा अरे मेरी तोबा ,
आज फिर डग-मगाने  लगी हे,,,,,
उनके जाते ही ये दिन भी देखे,
रात आँसू बहाने लगी हे,,
चाँद से अब  निकलते हे शोले,
चाँदनी दिल जलाने लगी हे,,,,

सामने मुस्कुराती हे मंज़िल ,
पाव लेकिन उठाना हे मुशकील,
ए अज़ल तू ही दे दे सहारा ,
जिन्दगी डग-मगाने लगी हे
अश्क आँखों में आए तो पी ले,
दिल जो रोये तो होठों को सी ले,
ए मुहोब्बत तेरे आँसू ओ पे ,
अब हँसी उनको आने लगी हे,,