सर जुकाया पत्थर सनम बन गए,
इश्क बच गया हक्क आसना हो गए
रस्क करता हे करता हे काबा मेरे कुफ्र पर,
मेने जिस बुत को पूजा खुदा हो गया,
उसके घर का पता पूछते-पूछते,
पूछने वाला खुद लापता हो गया,
में महोब्बत से मुँह मोड़ देता अगर,
कौंध पड़ती ये बिजली किसी यार पर,
मेरे दिल की तबाही से ये तो हुआ,
कम से कम दूसरों का भलल्ला तो हुआ,
मेरे महेबूब इक तेरे गम के सिवा ,
जोमिला रास्ते से जुदा हो गाया,
कारोबारे तमन्ना में ये तो हुआ,
उनके कदमो पे मलने का मौका मिला,
जिन्दगी भर तो घाटा उथाते रहे ,
आज पेहली दफा फायदा हो गया,
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