आँख से दूर् ना हो दिल से उतर जयेगा,,,,,
वक्त का क्या हे गुजरता हे गुजर जयेगा,,,,,,,,
इतना मायुस ना हो खिलवटें गम से अपनी,
तू कभी ख़ुद को भी देखेगा तो डर जयेगा,,,,,,,,,
डूबते-डूबते कस्ती को उछला दे दु,
में नही कोई तो साहिल पे उतर जायेगा,,,,,,,,,
जिंदगी तेरी अता हे तो ये जानेवाला,
तेरी बख्शिस तेरी दहलीज़ पे धर जयेगा,,,,,,,
तुम सरे राह्-ए-वफ़ा देखते राह जाओगे,
ओर वो दोरे रफाकत से उतर जायेगा,,,,,,,,,,
जब्त लाजिम हे मगर दुःख; हे कयामत का "फराज़"
जालिम अब के भी ना रोयेगा तो मार जायेगा,
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