मर्द शीश कटाये नाक नहीं ,
नेता शीश गवाये वोट नहीं,
कई चीजों की जहाँ में ये प्रतीक हो गई,
वो आदमी आदमी नहीं जिसकी नाक कट गई,
लगी है माथे पर , पर महिमा उसकी माथे से अधिक भइ ,
आँख को काजल ओर सुरमा नाक को तपकिर सही,
मर्द शीश कटाये नाक नहीं,.......................................
इस नाक के जहाँ में है, प्रकार अनेक,
लंबी चौड़ी मिर्ची जैसे घाट अनेक,
कही बोफोर्स कि गन कही मिल के धुएँ की नली ,
मर्द शीश कटाये नाक नहीं,....................................................
एक ज्योतिषी का कथन है,
अजीब घटना होगी,
इक्कीसवीं सदी मै,
किसी कि नाक नही होंगी,
इस दौर में नाक से महत्वपूर्ण कुर्सी होगी,
उसपर बैठे हुए आदमी कि,
हालत योगी से बढके होगी,
आस-पास लाखों मारे जाए ,
नहीं कोई असर होगी,..
लेकिन मेरा विस्वास है,
राम- कृष्णा कि भूमि में,
ऐसी घटना, कभी संभव नहीं होगी ,
इस लिए मेरी आपसे प्रार्थना है,
अभ्यर्थना है, आपकी क्षिण होती ,
लुप्त होती, नाक की ओर ध्यान दे,
इसकी गरीमा को बनाए रख्खे,
इंसानियत के लिए, इंसानियत के लिए, इंसानियत के लिए,,,,, ,........................................
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