राजदारो से बचके चलता हूँ,
गम-गुसारो से बचके चलता हूँ,
मुजको धौका दीया सहरौन ने,
अब सहरौन से बचके चलता हूँ,
शब-ए-गम की सहर नही होगी,
वो भी तो मेरे घर नही होगी,
जिन्दगी तू ही मुक्तसर हो जां,
शब-ए-गम मुक्तसर नही होगी,
रात यूं दिल में तेरी भुली हुई याद आई,
जैसे वीराने में बाहर आ जाए,
जैसे सेहरा में होले से चले बाद-नशी,
जैसे बीमार को बे-वजहाँ करार आ जाये,
मेने पूर-नूर सितारों में तुजे देखा हे,
मेने मासूम बहरों में तुम्हे देखा हे,
मेरे महेबूब तेरी पर्दा-नशीनी की कसम,
मेने अश्कों की कतारों में तुजे देखा हे,
आज की बात फिर नही होगी,
ये मुलाकात फिर नही होगी,
ऐसे बदल तो फिर आयेंगे,
ऐसी बरसात फिर नही होगी,,
रात उनको भी यूं हुआ महेसुस,
जैसे ये रात फिर नही होगी,
एक नजर मूड के देखने वाले,
क्या ये खैरात फिर नही होगी,
अंगडाई पे अंगडाई लेती हे रात जुदाइ की,
तुम क्या समजो तुम क्या जानो,
बात मेरी तन्हाइ {रूसवाई} की,
टूट गए सैयार नगीने, फुट बहे रुखसारो पर,
देखो मेरा साथ ना देना, बातें हे ये रुस्वाई की,
कौन सियाही घोल रहा हे, वक्त के बेहते दरीया में,
मेने आँख जुकी देखी हे ,आज किसी हरजाई की,
वस्ल की रात ना जाने क्यों,
इसरार था उनको जाने पर,
वक्त से पहेले डूब गए, तारों ने बड़ी दानाइ की,
उड़ते-उड़ते आस् का पन्छी,
दूर् उफक में डूब गया,
रोते-रोते डूब गई आवाज़ किसी सौदाइ की,,,,,
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