Thursday, 13 December 2012


तिर नजर का ओ दिलदारा,
तूने इस अंदाज़ से मारा,  हो  दुनिया मान गये,

तिर नजर का ओ दिलदारा,
तूने इस अंदाज़ से मारा, हो दुनिया मान गये,
के तू हे बड़ा रस नाम हे तेरे,
शाम अवध की बाल हे तेरे,,,
तड़पा तू क्या मस्त जवानी,
देख् के दुनिया हो दीवानी,,
ए ज़ुल्फ घनेरी यूँ लेहराये,
जैसे सावन जुमके आए,,,
कोमल-कोमल अंग हे तेरा,
चांदी जैसा रंग हे तेरा,
ए रेश्मी आँचल दस्त हिनाइ,
आती तेरी हर अँगड़ाई,
देखके जिसको मन ललचाये,
पतली कमर को क्यूँ बलखाये,
पग-पग धरती चूम रही हे,,,,
नागन जैसी जूम रही हे,
सर से पाव तक चलता जादू,
किसको रहे फिर दिल पे काबू,

चंचल नट-खट सौक हसीना,
लब पर हसी ओर दिल में सीना,
ओर दिल से खेले चाल जताकर,
मारा सबको अपना बनाकर,,,,,
हो तिर्छी नजर का करके इशारा,,
एक नही क्या लाखो को मारा,,,,,,
हो दुनिया मान गई,,,,,,,,

जाने तमन्ना जाने ग़ज़ल हे,
हुश्न-ए-मुजस्सम ताज-महल हे,,,
कहेलाने को माँहेजबीं हे,
हुश्न-ए-मुव्व्जब दिल में नही हे,
तेरी अदा ये जान की दुश्मन,
दस लेती हे बनके नागिन,
चाहने वाला चैन गवाये,
रोते-रोते नैन गवाये,
ए अमृत केहकर जहर पिलाये,
पिने वाला जान से जाए,
पीने वाला जान से जाए,
इसको त्यागा उसको लूटा,
कोई ना तेरे प्रेम से छूटा,
मारी एसी नैन कटारी,
जो भी लगा वो पंख पसारी,
हो गया दिल पारा-पारा,
बच ना सका कोई गम का मारा,
तीरे नजर का ,,,,,हो दुनिया,,,,,,,,,,







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