Saturday, 8 December 2012


हम सफर बनके हम साथ हे आज भी,

फिर भी हे ये सफर अजनबी-अजनबी,,
राह् भी अजनबी, मोड़ भी अजनबी,
जायेंगे हम किधर, अजनबी-अजनबी,,,
जिन्दगी हो गई हे सुलगता सफर,
दूर तक आ रहा हे धुँआ सा नजर,
जाने किस मोड़ पर, खो गइ हर खुशी,
देख् दर्द-ए- जिगर, अजनबी-अजनबी,
हमने चुन-चुन के तिनके बनाया था जो,
आशियाँ हसरतों से सजाया था जो,
हे चमन में वही, आशियाँ आज भी,
लगता हे मगर अजनबी-अजनबी,,
किसको मालूम था दिन ये भी आयेंगे,
मौसमों की तरहा दिल बदल जायेंगे,
दिन हुआ अजनबी, रात भी अजनबी,
हर घड़ी, हर प्रहर अजनबी-अजनबी,

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