Saturday, 22 December 2012

ग़म मुझे, हसरत मुझे, वहशत मुझे, सौदा मुझे, एक दिल देकर ख़ुदा ने, दे दिया क्या क्या मुझे, ,
है हुसूल-ए-आरज़ू का राज़, तर्क-ए-आरज़ू,
मैंने दुनिया छोड़ दी तो मिल गयी दुनिया मुझे, कह के सोया हूँ ये अपने इज़्तिराब-ए-शौक़ से, जब वो आयें क़ब्र पर फ़ौरन जगा देना मुझे
सुबह तक क्या क्या तेरी उम्मीद ने ताने दिए आ गया था शाम-ए-ग़म एक नींद का झोंका मुझे,
ये नमाज़-ए-इश्क़ है कैसा अदब किसका अदब, अपने पा-ए-नाज़ पर करने भी दो सज़दा मुझे, देखते ही देखते दुनिया से मैं उठ जाऊँगा, देखती ही देखती रह जायेगी दुनिया मुझे ,,,,,

तेरे क़रीब आके बड़ी उलजनो में हू,
में दोस्तों में हू, के तेरे दुश्मनों में हू,
मुजसे गुरेज-पा-हे तो हर एक रास्ता बदल,
में संग-ए-राह् हूँ, तो सभी रास्तों में हू,
तू आ चुका हे सतह पर कबसे ख़बर नही,
बे-दर्द में अभी उन्ही गहेराइयो में हू,
ए-यार-ए खुश दयार तुजे क्या ख़बर के में,
कबसे उदासीयो के घने जंगलो में हू,
तू लूट कर भी एहले-तमन्ना को खुश नही,
में लूट के भी वफ़ा के उन्ही काफिलो में हू,

बदला ना मेरे बाद भी मोजों-ए-गुफ्तेगु,
में जा चुका हूँ फिर भी तेरी महेफिलो में हूँ,
मुजसे बिछड़ के तू भी तो रोयेगाँ उम्र-भर,
ये सोच ले के में भी तेरी ख्वाहिशों में हू,
तू हस रहा हे मुज पर मेरा हाल देखकर,
ओर फिर भी सरीक में तेरे केह-कशो में हू,
ख़ुद भी मिसाल-ए-लाला-ए सहेरा लहू-लहू,
ओर ख़ुद "फराज़" अपने तमाशाइयो में हू,

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