फिर उसी बेवफ़ा पे मरते हैं
फिर वही ज़िन्दगी हमारी है
फिर खुला है दर-ए-अदालत-ए-नाज़
गर्म बाज़ार-ए-फ़ौजदारी है
हो रहा है जहाँ में अँधेर
ज़ुल्फ़ की फिर सरिशतादारी है
फिर दिया पारा-ए-जिगर ने सवाल
एक फ़रियाद-ओ-आह-ओ-ज़ारी है
फिर हुए हैं गवाह-ए-इश्क़ तलब
अश्क़बारी का हुकुमज़ारी है
दिल-ओ-मिज़्श्गाँ का जो मुक़दमा था
आज फिर उस की रूबक़ारी है
बेख़ुदी बेसबब नहीं "ग़ालिब"
कुछ तो है जिस की पर्दादारी है
फिर वही ज़िन्दगी हमारी है
फिर खुला है दर-ए-अदालत-ए-नाज़
गर्म बाज़ार-ए-फ़ौजदारी है
हो रहा है जहाँ में अँधेर
ज़ुल्फ़ की फिर सरिशतादारी है
फिर दिया पारा-ए-जिगर ने सवाल
एक फ़रियाद-ओ-आह-ओ-ज़ारी है
फिर हुए हैं गवाह-ए-इश्क़ तलब
अश्क़बारी का हुकुमज़ारी है
दिल-ओ-मिज़्श्गाँ का जो मुक़दमा था
आज फिर उस की रूबक़ारी है
बेख़ुदी बेसबब नहीं "ग़ालिब"
कुछ तो है जिस की पर्दादारी है
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