Tuesday, 11 December 2012


बहोत खूब-सूरत हे आँखें तुम्हारी,,,,,
अगर हो इनायत ए-जान-ए महोब्बत,
बना दीजये इनको किस्मत हमारी,,,,
जो सबसे जुदा हे वो अंदाज़ हो तुम,
छुपा था जो दिल् में वो ही राज हो तुम,
तुम्हारी नज़ाकत बनी जब से चाहत ,
सुकून बन गई हे हर एक बे-करारी,,,,,,,,,
ना थे जब-तलक तुम हमारी नजर में,
ना था चाँद सब में ना सूरज सहर में,
तुम्हारी इजाज़त, तुम्हारी हुकूमत,
ये सारा गगन हे, ये धरती हे सारी,,,,,,,,,,

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