Thursday, 6 December 2012


जवानी के, ही ले हया के बहाने,
ये माना के तुम से पर्दा करोगी,
ये दुनिया मगर तुज सी भोली नही हे,
छुपकर महोब्बत को रुस्वा करोगी,,,,
बड़ी कोशीशो से बड़ी कावीसो से,
तमन्ना की सेहमी हुई साजीसो से,
मिलेगा जो मौका तो बे-चैन होकर,
दरीचों से तुम मुज को देखा करोगी,,,,,,,,
सतायेगी जब चाँदनी की उदासी,
दुखा;येगी दिल जब फिज़ा की खमोशी,
उफक की तरफ़ खाली नजरे जमा कर,
कभी जो ना सोचा वो सोचा करोगी,,,,,,,,,
कभी दिल की धड़कन मेहसुस होगी,
कभी ठंडी सांसो के तूफां उठेंगे,
कभी गिर के बिस्तर पे आहे भरोगी,
कभी जुक के तकिये पे रोया करोगी,,,

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