mukesh875
Wednesday, 19 December 2012
निस्बत हुई जब से मुजे तेरे नाम से,
दुनिया पुकारती हे बड़े एहतराम से,
जब-तक बीका ना था तो कोई पूछता ना था,
तूने खरीदकर मुजे, अनमोल कर दीया,
जब से तुने दीवाना बना रख्खा हे,
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