ग़म मुझे, हसरत मुझे, वहशत मुझे, सौदा मुझे,
एक दिल देकर ख़ुदा ने, दे दिया क्या क्या मुझे, ,
है हुसूल-ए-आरज़ू का राज़, तर्क-ए-आरज़ू,
मैंने दुनिया छोड़ दी तो मिल गयी दुनिया मुझे,
कह के सोया हूँ ये अपने इज़्तिराब-ए-शौक़ से,
जब वो आयें क़ब्र पर फ़ौरन जगा देना मुझे
सुबह तक क्या क्या तेरी उम्मीद ने ताने दिए ,
आ गया था शाम-ए-ग़म एक नींद का झोंका मुझे,
ये नमाज़-ए-इश्क़ है कैसा अदब किसका अदब,
अपने पा-ए-नाज़ पर करने भी दो सज़दा मुझे,
देखते ही देखते दुनिया से मैं उठ जाऊँगा,
देखती ही देखती रह जायेगी दुनिया मुझे ,,,,,
No comments:
Post a Comment