शाम-ए-फिराक अब ना पूछ
आई ओर आ के टल गइ,,,,,,,
दिल था के दिल बहल गया,
जां थी की फिर सम्हल गइ,,,,,,,
बज़्मे खयाल में तेरे,
हुश्न की शम्म जल गइ,,,,,,,
दर्द का चाँद बूज गया,
हिज्र की रात जल गइ,,,,,,,,
जब तुजे याद कर लिया,
सुबहा महेक-महेक उठी,
जब तेरा गम जगा दीया,
रात मचल-मचल गइ,,,,,,,,,
दिल से तो हर मामला,
करके चले थे साफ़ हम,
कहने में उनके सामने ,
बात बदल-बदल गइ,,,,,,,,,
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