बाझीचा-ए-अत्फाल हे दुनिया मेरे आगे,,,,,
होता हे शब्-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे,,,,,,
गो हाथ को जुम्बिश नही आंखो में तो दम हे,
रहने दो अभी सागर-ओ-मीना मरे आगे,,,,,,
मत पूछ क्या हाल हे मेरा तेरे पिछे,
तू देख् के क्या रंग तेरा हे मेरे आगे,,,,,,,,
ईमाँ मुजे रोके हे, जो खींचे हे मुजे कुर्फ,
काबा मेरे पिछे हे, कलिशा मेरे आगे,,,,,,,,,
होता ही नही गर्द में सेहरा मेरे होते,
घिसता हे ज़बां खाक में दरीया मेरे आगे,,,,,,
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