Friday, 9 November 2012


चांदी का बदन सोने की नजर,
उस पर ये नज़ाकत क्या कहीये,
किस-किस पे तुम्हारे जलवों ने,
छोड़ी है कयामत क्या कहिये, हे जी क्या कहिये,,,
गुस्ताख जुबाँ गुस्ताख नजर,
ये रंगे तबीयत क्या कहिये,
ऐसे भी कही इस दुनिया में ,
होती हे महोब्बत क्या कहिये,,,,,,
आँचल की धनक से साये में,
ये फुल गुलाबी चेहरों के,
ये गुल भी हे गुल्शन भी हे,
और खार हे गुलमत भी,ये गुल भी हे गुल्शन भी हे,
इस वक्त हमारी नजरों में,
क्या चीज हे जन्नत क्या कहिये,

नजरों में नजरों में,,,,
तुमसे नजरे जो मिली,
दिलो दुनिया से गए,
इक तमन्ना के सीवा,
हर तमन्ना से गए,
मस्त आँखों से जो पी,
जामो मीना से गए,
जुल्फ लेहराइ जहा,
हम भी लेहराते गए,
नूर मिलती हे जिसे,
इसकी परवाह से गए,
इस वक्त हमारी नजरों में ,
क्या चिज हे जन्नत,
क्या कही ये,

यु गर्म निगाहे मत डालो,
ये जिस्म पिघल भी शकते है,,,,
ये नही रुप की शबनम,
रंग निगाह डालो मध्यम,
आदाब-ए- नजारा भुले हो,
तुम लोगो की वहेशत क्या कही ये,
तुम हमे देख शको, इसका इमकान नही,
ख़ुद को बदनाम करे, हम वो नादान नही,
कोई मरता हे मरे , हम पे एहसान नही,
तुमसे क्यू बात करे, तुमसे पेहचान नही,,,
जिन लोगो को तुम ठुकराके चलो,
वो लोग भी किस्मत वाले हे,


No comments:

Post a Comment