तुम बिन जीवन, कैसा जीवन,
फुल खिले तो, दिल मुरझाये,
आग लगे जब बरसे सावन,
तुम बिन जीवन,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
रूठे तुम ज़ब से प्रिया,
सुना सा हे मन का डेरा,
फुल खिले तो, दिल मुरझाये,
आग लगे जब बरसे सावन,
तुम बिन जीवन,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
रूठे तुम ज़ब से प्रिया,
सुना सा हे मन का डेरा,
बैरी हे दुनिया बाँटे कोई क्यूँ दुःख; मेरा,
अपने आंसु अपना ही दामन.,,,,,,,,
तुम बिन,,,जीवन,,,,,,,,,,
कैसे दिल बेहले, हँसना चाहूं रोना आए,
ढूँढा जग सारा,
कुछ ना सूजे कुछ ना भाये,
अपने आंसु अपना ही दामन.,,,,,,,,
तुम बिन,,,जीवन,,,,,,,,,,
कैसे दिल बेहले, हँसना चाहूं रोना आए,
ढूँढा जग सारा,
कुछ ना सूजे कुछ ना भाये,
तोड़ गए तुम मन का दर्पण,,,,,,
किसको समजाउ,
गुजरी क्या-क्या, बिती क्या-क्या,
पूछें ये दुनिया, किसके हाथों ये दिल टूटा,
हाल हुआ ये किसके कारण,,,,,,
तुम बिन जीवन,,,,,,,,,,,,,,,,
किसको समजाउ,
गुजरी क्या-क्या, बिती क्या-क्या,
पूछें ये दुनिया, किसके हाथों ये दिल टूटा,
हाल हुआ ये किसके कारण,,,,,,
तुम बिन जीवन,,,,,,,,,,,,,,,,

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