एक कतरा जब अश्क का दिल से जुदा होता हे,
तब मान लो आस्माँ से सिहर के खुदा रोता हे,,,,,,,,,,,,,
एक कतरा जब अश्क का दिल से जुदा होता हे,
तब मान लो आस्माँ से सीहर के खुदा रोता हे,,,
आँखों को तो मिल जाता हे बहाना नहाने का,
दिल मसल के ख़ुद को एक-एक कतरा अपने बहाने का,,,,
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