दिन गुजर गया एतबार में,
रात कट गई इंतज़ार में,,,,
वो मजा कहा वस्ले-यार में,
लुत्फ जो मिला इंतज़ार में,,,,,,,
उनकी एक नजर काम कर गई,,
होश अब कहा होशे-यार में,,,,,,
मेरे हासीले कायनात हे,
में हूँ आपके इख्तेयार में,,,,
आँख जो उथ्थी, उनकी तरफ़,
दिल उलज गया हुश्ने खार में,,
तुजसे क्या कहे कितने गम सहे,
हमने बे-वफ़ा तेरे प्यार में,
फिकरे आशियाँ हर खिजाँ में थी,
आशियाँ जला गर बहार में,,,,,,,,
किस तरहा ये गम भूल जाए हम,
वो जुदा हूँआ इस बहार में,
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