Friday, 2 November 2012


चाँद आहे भरेगा, फुल दिल थाम लेंगे,
हुश्न की बात चली तो, सब तेरा नाम ही लेंगे,,
ऐसा चेहरा हे तेरा , जैसे रोशन सवेरा,
जिस जगह तू नही हे, उस जगह हे अन्धेरा,
कैसे फिर चैन तुज-बिन तेरे बदनाम लेंगे,,,,
आँखें नाजुक सी कलिया,बातें मिसरी की डलियाँ,
होँठ गंगा के साहिल,,,जुल्फे जन्नत की गलियाँ,
तेरी खातिर फरिश्ते ,सर पे इल्ज़ाम लेंगे,,,,

चुप ना होगी हवा भी, कुछ कहेगी घटा भी,
और मुमकिन हे तेरा जिक्र करदे खुदा भी,
फिर तो पथ्थर ही शायद जब्त से काम लेंगे,,,


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