mukesh875
Sunday, 18 November 2012
जिंदगी इस कदर किसी का इंतेहा ना ले,,,,,
जो मर रहे हे, उनको जिने की दुआ ना दे,,,,
जब दफन हे खाक में उस ज़ीस्त का वजूद,
बुजती हुई चिनगारी को फिर से हवा ना दे,,,,
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment