तिश्नगी आब आप हो जाए,
वादा-नुशी शवाब हो जाए,
तुम अगर मुस्कुराके जाम भरो,
सादा पानी शराब हो जाए,
साकी से भरके जाम लिया,
जब हमने ये सुना के ये पीना हराम हे,
अल्ला मिया का नाम लिया ओर पी गए,,
पत्थर के जिगर वालों,गम में वो रवानी हे,
ख़ुद राह् बना लेगा, बेहता हुआ पानी हे,,,,,,,,,,,
मै खाने की ए-साकी एसी रुत् ये सुहानी हे,
हर एक के सागर में, अंगूर का पानी हे,,,,,,,,,,,,
क्यूँ चाँदनी रातों में,दरीया में नहाते हो ,
सोये हुए पानी में, क्या आग लगानी हे,,,,,,,,,,,,,
जब देखके छुपते थे, अब देखते हे छुपके,
वो दौरे लडक-पन का, ये दौरे जवानी हे,,,,,,,,,,,
इस जेहन-ए-परिशॉ में, एक फुल सा चेहरा हे,
पत्थर की हिफाज़त में, शीशे की जवानी हे,,,,,,,,,
मुमकिन ही नही मिलना तुम शम्मा में सुरज हूँ
में दिन का मुसाफिर हूँ, तू रात की रानी हे,,,,,,,,
कश्मीर की वादी में, बे-पर्दा जो निकले हो,
बर्फीलो पहाड़ों में, क्या आग लगानी हे,,,
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