महोब्बत एक हकिकत हे, ये अफसाना नही होता,
कभी अपनी खुशी से कोई दीवाना नही होता,
हसी जलवों का मरकज हे जहां तुम सजदा करते हो,
वहां काबा नही होता, के बूट खाना नही होता,
करमहे उन खयालो का जो दिल बेहलाये रखते हे,
भला किसके तसव्वुर में सनम खाना नही होता,
जो एहले जर्फ होते हे, ब-कदरे जर्फ पीते हे,
छलक जाता हे जो, वो उनका पैमाना नही होता
नजर का हुश्न भी सामिल हो, पैमानों में ए- रिन्दों,
जहां साकी नही होता, वो मै खाना नही होता,
महोब्बत की परस्तीस के लिए एक रात काफी हे,
सुबहा तक जिन्दा रह जाए, वो परवाना नही होता,
तसव्वुर को भी ए-"सादाब" हम अपना समजते हे,
जो देते हे तसल्ली दिल को, दे-दाना नही होता,
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