मरने के बाद भी मेरी आँखें खुली रही,
आदत पड़ी हुई थी इन्हे इंतज़ार की,
जब तुजे दिल से भुलाने की कसम खाई हे,
और पेहले से भी ज्यादा तेरी याद आई हे,,,,,,
चाँद अंगड़ाइयाँ ले रहा हे,
चाँदनी मुस्कुराने लगी हे,,,
एक भुली हुई सी कहानी ,
फिर मुजे याद आ ने लगी हे,,,,
किस ने बिखरा दीये अपने गेंसु,
अब घटा और छाने लगी हे,
तोबा-तोबा अरे मेरी तोबा ,
आज फिर डग-मगाने लगी हे,,,,,
उनके जाते ही ये दिन भी देखे,
रात आँसू बहाने लगी हे,,
चाँद से अब निकलते हे शोले,
चाँदनी दिल जलाने लगी हे,,,,
सामने मुस्कुराती हे मंज़िल ,
पाव लेकिन उठाना हे मुशकील,
ए अज़ल तू ही दे दे सहारा ,
जिन्दगी डग-मगाने लगी हे
अश्क आँखों में आए तो पी ले,
दिल जो रोये तो होठों को सी ले,
ए मुहोब्बत तेरे आँसू ओ पे ,
अब हँसी उनको आने लगी हे,,
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