Sunday, 18 November 2012


मेने मासूम बहरों में तुम्हे देखा हे,,,
मेने पुर नूर सितारों में तुम्है देखा हे,,
मेरे मेहबूब तेरी पर्दा-दारी की कसम,
मेने अश्कों की कतारों में तुम्हे देखा हे,,,,,,
जोर लगते गए फँसाने में,
राज खुलते गए छुपाने में,
रूठ ने का सबब तो तुम जानो,
हम तो गूम हे मनाने में,
तुने दिल के समज फूँक दीया,
मेरी दुनिया थी आसीयाने में,
मुजे शिकवा नही बरबाद रख, बरबाद रेहने दे,
मगर लिल्लाह मेरे दिल में अपनी याद रेहने दे,
बे-ख़ुद किए देते हे,,अंदाज़ हीजाबाना,
आ दिल में तुजे रखलु, ए जलवा-ए-जनाना,
क्या मेरी बात का यकीन नही,
कोई भी आपसा हसीन नही,
बे-जिजक दिल में तुम चले आ ओ,
इस मकाँ में कोई भी मकीन नही,
ए सर्-मन-ए नाज़नीं, 
मन अज मन चे दीदा इन,
एक बार पेहरे अज मन ए इसकी बुरी डारी,
तुजसा हसीन नही, नही तेरी मिसाल हे,
तेरा जमाल ए-न खुदा का जमाल हे,
क्यूँ  आँख मिलाइ थी, क्यूँ आँख लगाई थी,
क्यूँ रुख को छुपा बैठे, करके मुजे दीवाना,,
माना के मेंले मनहूँ,  
अब रुख ना छुपाना करके मुजे दीवाना,
जिस जां नजर आते हो, सजदे वही करता हूँ,
ईस से नही कुछ मतलब, काबा हो या बुत-खाना,
मालूम हक़ीक़त हो, जब मेरे जनाजे की,
तू शम्म-ए बनेगा 

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