जाते हुए ये पल चीन कयु जीवन लिए जाते हे,
जोड़े ये ही जोड़े ये ही तोड़े सब नाते,
मन जितना जीना चाहे,तन उतना ही मरताजाए,
इंसाँ की हिमाकत देखो, उम्मीद ही करता जाए,
कोई राह् मंज़िल की सूजे तो बतलाये,
रंग ओर सुगंध का जादू , सदियों से चलता आया,
इनसान इसी में डूबा नादान ये ही भरमाया,
अब कौन ये सोचे, क्या, खॊया ओर क्या पाया,
विश्वास में वास हे विष का, आशा में छुपी हे निराशा,
शब्दों के संग ना बेहना,अर्थो से भरी हर भाषा,
इनसान का दिल भी पत्थर सा जाए तराशा,
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