Monday, 7 May 2012


भाईरे .................
गंगा ओर जमुना की ,बेहती हे धार,
आगे या पीछे सबको हे जाना..हे पार......
धरती कहे पुकार के,
गीत गा ले प्यार के ,
मौसम बिता जाए,
मौसम बिता जाए,
अपनी कहानी छोड़ जा,
कुछ तो निशानी छोड़ जा,
कौन कहे इस और,
तू फिर आए ना आए, मौसम बिता जाए,..
तेरी राहो में कइयों ने नैना बिछाये,
डाली-डाली कोयल काली तेरे गीत गाये,,..
अपनी कहानी छोड़ जा,
भाइ  रे.......
नीला अंबर मुस्काये,
हर साँस तराने गाये,
हाये तेरा दिल क्यूँ मुरझाये,
मन की बंसी पे तू भी,
कोई धुन बजाले, 
तू भी मुस्कुराले,, भाइ  रे.....

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