कभी देवी बना दीया, कभी माँ बना दीया,
कभी बेटी तो कही बहन बना दीया,
युगों से नारी को, जो चाहा मन बना दीया,
नारी को पत्नि ,पुरुष को परमेश्वर बना दीया,
युगों से पुरुष रुपी भेड़ियों ने नारी का शोषण
किया, ओर बाकी बचा तो इसे सामाजिक व्यवस्था का नाम दीया,
ओर हिमाकत तो देखो पूरुषो की समाज सींचन का काम भी नारी के सर धरा,
पता नही नारी कब जगेगी,
और अपने सामाजिक उत्थान में लगेगी,
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