कभी ए-हकिकते मुंतिजर नजर आ लिबासे मजाज में,....
के हजारों सजदे तड़प रहे,हे मेरी जबिने नियाज़ में,......
ना बचा-बचा के तू रख इसे, तेरा आइना हे वो आइना,
के सीकस्ता हो तो अज़ीज़-तर, हे निगाहे आइना साज् में,......
ना वो इश्क में रही गर्मियां, ना वो हुश्न में रही शौखिया,
ना वो गज़ नबी में तड़प रही, ना वो खम हे जुल्फे अयाज में,.......
मे जों सर प सजदा कभी हुआ, तो जमी पे आने लगी कजा,
तेरा दिल तो हे सनम आशना , तुजे क्या मिलेगा नमाज में, ......
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