Saturday, 12 May 2012

इनसान सबसे पेहले बोलता हे वो शब्द हे माँ,
जिसका कोई शानी नही ,
उसकी ममता किसी भी युग में फानी नही, 
ओर माँ के बग़ैर किसी की ज़िंदगानी नही,
मेरी दुनिया हे माँ, तेरे आंचल में,
शीतल छाया तू ,दुख के जंगल में,
ओ मेरी रहो के  दीये, तेरी दो अँखिया,
मुजे गीता से  बड़ी तेरी दो बतिया,
जूग में  मिलता वो, सो मिला है पल में,
मेने आँसू ही दीये पर तू रोई ना, 
ओ, मेरी निंदिया के लिए, बरसो सोइ ना,
ममता बाँटे रही गम की हल-चल में,
काहे ना धौ के पिएँ ये चरण तेरे माँ,
देवता प्याला लिए, दरपे खड़े माँ,
अमृत सरका हे इस गंगा जल में.......





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