Thursday, 10 May 2012

सुबहा तक इंतज़ार  करो,
तुम खुल जाओगे,  कमल की पत्ती की तरहा,
कई भंवरों ने दम तोड़ा होगा ,
लम्हा-लम्हा तेरी आगोश में, एक कैदी की तरहा,========================,
अँगड़ाई पर अँगड़ाई,
लेती हे रात जुदाई की,
तुम क्या समजो तुम क्या जानो,
बात मेरी तन्हाइ की,
टूट गए सैयार नगीने,
फुट बहे रुखसारो पर,
देखो मेरा साथ ना देना,
बातें हे ये रूसवाई की,
कौन सियाही ढोल रहा था,
वक्त के बेहते दरीया में,
मेने आँख जुकी देखी हे,
आज किसी हरजाई की,
कत्ल की रात ना जाने क्यूँ,
इसरार था उनको जाने पर,
वक्त से पेहले डूब गए ,तारों

वक्त से पेहले डूब गए ,तारों ने बड़ी दानाइ की,
उड़ते उदते आँख का पन्छी,
दूर् उफक में डूब गया,
रोते -रोते बैठ गई, आवाज़ किसी सौदाइ की,

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